79 वर्षीय उद्यमी ने “Shark Tank India” में ऑटो कंपनी MK का किया निवेश के लिए पिच, बाजार में बजाज जैसी बड़ी कंपनियों से मुकाबले की योजना

79 वर्षीय भूपेन ने "Shark Tank India" में MK ऑटो कंपनी पेश की, 70 करोड़ रुपये का मूल्यांकन किया।

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Shark Tank Season 4

पारंपरिक और युवा उद्यमिता के बीच एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 79 वर्षीय भूपेन, जो एक अनुभवी व्यवसायी और MK ऑटो कंपनी के संस्थापक हैं, ने हाल ही में “Shark Tank India” के चौथे सीजन में अपनी कंपनी का पिच किया। इस पिच में उनके साथ उनके सह-संस्थापक भी थे, जो उनके पुराने दोस्त के बेटे हैं। भूपेन और उनके सह-संस्थापक ने शो पर निवेशकों से 5% इक्विटी के बदले में 3.5 करोड़ रुपये की मांग की, जिसके तहत उनकी कंपनी का मूल्यांकन 70 करोड़ रुपये किया गया।

शार्क टैंक में अपनी प्रस्तुति के दौरान भूपेन ने खुलासा किया कि उनकी कंपनी ने अब तक किसी भी उत्पाद की बिक्री नहीं की है, लेकिन उनका लक्ष्य प्रति माह 100 यूनिट्स का निर्माण करना है। उन्होंने निवेशकों से कहा कि उनका सपना MK को एक 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय बनाना है, जो बड़े ऑटोमोबाइल ब्रांड्स जैसे Bajaj से मुकाबला कर सके। भूपेन ने यह भी बताया कि वह शो को कई वर्षों से देख रहे हैं और उनकी पत्नी ने उन्हें प्रेरित किया था कि वह इस मंच पर अपनी कंपनी का पिच करें।

भूपेन की उम्र 79 वर्ष है, लेकिन उनका उत्साह और जोश देखने लायक था। शार्क पैनल में शामिल सभी निवेशक उनके जोश से प्रभावित हुए। विशेष रूप से, अमन गुप्ता ने भूपेन की मानसिकता को सराहा और यह भी बताया कि वह इस पिच से काफी खुश हैं, खासकर जब भूपेन ने कहा कि उनकी पत्नी अमन की बहुत बड़ी फैन हैं। हालांकि, अमन गुप्ता यह कहते हुए इस डील से बाहर हो गए कि उन्हें ऑटोमोबाइल उद्योग का अनुभव नहीं है और इसलिए वह इस निवेश में शामिल नहीं हो सकते।

शार्क टैंक के अन्य निवेशक भूपेन से इस तथ्य के बारे में जानना चाहते थे कि वह Bajaj जैसी स्थापित कंपनियों से कैसे मुकाबला करेंगे। इस पर भूपेन ने आत्मविश्वास से जवाब दिया कि उनकी कंपनी के ऑटोमोबाइल्स अधिक शक्तिशाली और सस्ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी ऑटो निर्माताओं के पास समान सप्लायर्स से पुर्जे आते हैं, लेकिन वह खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का इरादा रखते हैं, ताकि उनके उत्पादन की गुणवत्ता और लागत पर अधिक नियंत्रण हो सके।

नामिता थापर, जो कि एक प्रमुख निवेशक हैं, ने भूपेन से पूछा कि वह इन बड़े ब्रांड्स के साथ कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे। भूपेन ने बिना हिचकिचाए जवाब दिया कि उनकी तकनीकी और मूल्य निर्धारण दोनों में प्रतियोगिता से एक मजबूत पकड़ होगी।

भूपेन के सह-संस्थापक ने अपनी शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया कि उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई की और 1991 में जापान में पोस्ट-डॉक्टरल फैलोशिप प्राप्त की। यह अनुभव MK के लिए एक मजबूत बौद्धिक आधार प्रस्तुत करता है। इस पिच के दौरान, अमन गुप्ता ने मजाक करते हुए कहा, “उस समय रितेश (अग्रवाल) पैदा होने वाले थे,” जो उनकी साथी शार्क रितेश अग्रवाल के लिए एक हल्का-फुल्का कमेंट था।

जब पिच का अंत हुआ, तो सभी शार्क निवेश करने से पीछे हट गए, हालांकि उनका भूपेन के प्रति सम्मान और प्रशंसा स्पष्ट थी। भूपेन ने बताया कि वह एक बड़ी ऑटोमोटिव कंपनी बनाने का सपना देखते हैं, और इसके लिए उनका जुनून और प्रयास स्पष्ट था, बावजूद इसके कि वह वर्तमान में एक छोटे से व्यवसाय के रूप में शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सफलता पर पूरा भरोसा है और अगर वह सही दिशा में आगे बढ़े तो वह जल्द ही एक बड़ा नाम बन सकते हैं।

यह पिच इस बात का उदाहरण है कि उम्र और अनुभव की परवाह किए बिना, अगर एक उद्यमी में जुनून और सही दृष्टिकोण हो, तो वह किसी भी उद्योग में सफलता हासिल कर सकता है। भूपेन और उनके सह-संस्थापक ने साबित कर दिया कि एक मजबूत विज़न और आत्मविश्वास के साथ, कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

“Shark Tank India” के इस सीजन ने यह दिखाया कि भारत में अब उद्यमिता का नया दौर आ चुका है, जहां हर आयु वर्ग के लोग अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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