दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की नजदीकी को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अपने हमले तेज़ कर दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में एक बयान में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी का कहना था कि जैसे मोदी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाई, ठीक उसी तरह केजरीवाल भी अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं।
राहुल गांधी का यह बयान दिल्ली में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर स्पष्ट संदेश देता है कि पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका को गंभीरता से लेने की योजना बना रही है। मंगलवार (14 जनवरी 2025) को कांग्रेस के एक सूत्र ने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने पार्टी के दिल्ली नेताओं और उम्मीदवारों को एक स्पष्ट निर्देश दिया है। इस निर्देश में राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस को अब अरविंद केजरीवाल की नाकामियों का पर्दाफाश करना होगा और पार्टी के सभी नेता और उम्मीदवार केजरीवाल पर खुलकर हमले करें।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी का यह कदम कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का हिस्सा है, जिसमें पार्टी की रणनीति यह है कि वह AAP के खिलाफ जनता में जागरूकता फैलाए और जनता को बताने का प्रयास करे कि केजरीवाल ने पिछले कुछ सालों में जो वादे किए थे, उन पर वह खरा नहीं उतर पाए। कांग्रेस का यह भी मानना है कि दिल्ली के विकास के मुद्दे पर केजरीवाल की सरकार ने अधिकतर वादों को पूरा नहीं किया, जिससे लोगों में उनके प्रति असंतोष बढ़ा है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से इस तरह की आक्रामक रणनीति से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी दिल्ली में अपनी ताकत फिर से स्थापित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर चुनाव प्रचार सही तरीके से हुआ तो कांग्रेस दिल्ली की जनता में AAP के खिलाफ माहौल बना सकती है।
कांग्रेस के इस कदम के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। AAP के नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके शासन में दिल्ली में कई अहम योजनाओं और विकास कार्यों को लागू किया गया है, जो दिल्लीवासियों के लिए फायदेमंद साबित हुए हैं।
इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब और भी दिलचस्पी बढ़ गई है। सभी पार्टियां अपनी-अपनी चुनावी रणनीतियों को तेज़ कर चुकी हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोप-प्रत्यारोप का दिल्लीवासियों पर क्या असर होता है।