पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक सख्त पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मौजूदा तरीके से SIR जारी रहा तो बड़े पैमाने पर मतदाताओं के अधिकार छीने जा सकते हैं और इससे भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
शनिवार, 3 जनवरी 2026 को लिखे गए इस पत्र में ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को अव्यवस्थित, जल्दबाजी में लागू और बिना पर्याप्त तैयारी का बताया। उनका कहना है कि राज्य में यह अभ्यास न तो ठोस योजना के साथ किया गया और न ही जमीनी स्तर पर इसकी सही तैयारी दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया आनन-फानन में शुरू की गई, जिसका सीधा असर आम मतदाताओं पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में SIR की कई खामियों की ओर इशारा किया। ममता बनर्जी के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली में गंभीर तकनीकी कमियां हैं, अधिकारियों को स्पष्ट और एक समान निर्देश नहीं दिए गए और इस संवेदनशील काम के लिए तैनात कर्मियों को पर्याप्त प्रशिक्षण तक नहीं मिला। उनका कहना है कि इन कमियों के चलते वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा बढ़ गया है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि यदि मौजूदा स्वरूप में SIR को जारी रहने दिया गया, तो इससे अपूरणीय क्षति होगी। उन्होंने इसे संविधान की भावना और लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला बताया। पत्र में चेतावनी दी गई कि इससे लाखों लोगों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय चुनाव आयोग से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने बूथ-स्तरीय एजेंटों की नियुक्ति न होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। ममता बनर्जी ने साफ किया कि अगर सुधार नहीं हुए, तो इस प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना ही एकमात्र विकल्प होगा।
