मोहन भगवत लव जिहाद की परिभाषा तय करें: ओवैसी ने संसद में आंकड़ों की मांग की

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हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आज ‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और RSS को सीधा कटघरे में खड़ा कर दिया। ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर देश में वाकई लव जिहाद हो रहा है, तो सरकार संसद में इसके आंकड़े क्यों नहीं पेश कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि बिना डेटा और स्पष्ट परिभाषा के इस मुद्दे पर कानून बनाना केवल डर फैलाने की राजनीति है।

BJP शासित राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ बनाए जा रहे कानूनों और RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि इस पूरे मुद्दे को मानकीकृत और औपचारिक बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि अगर यह कोई वास्तविक समस्या है, तो इसके ठोस सबूत, परिभाषा और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने लाए जाने चाहिए।

ओवैसी ने चुनौती भरे लहजे में कहा, “जिन-जिन राज्यों में BJP की सरकार है, वहां का रिकॉर्ड सामने रखिए। बताइए कहां-कहां लव जिहाद हुआ है।” उन्होंने यह भी पूछा कि पिछले 11 वर्षों में कितने मामले दर्ज हुए, कितनों में सजा हुई और कितने आरोप साबित हुए। “अगर लव जिहाद हो रहा है, तो संसद में डेटा क्यों नहीं दिया जा रहा?” ओवैसी ने सवाल किया।

AIMIM प्रमुख ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर कोई महिला या पुरुष 18 या 21 साल का है और अपने फैसले खुद ले रहा है, तो वह कानूनन उसका अधिकार है। “यह मेरी या किसी और की पसंद-नापसंद का मामला नहीं है। कानून उन्हें यह आज़ादी देता है,” उन्होंने कहा।

ओवैसी की यह टिप्पणी RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लव जिहाद से निपटने की शुरुआत परिवारों से होनी चाहिए। भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा था कि परिवारों में संवाद की कमी और जागरूकता का अभाव ऐसी घटनाओं की वजह बनता है। उन्होंने समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर लव जिहाद को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। जहां BJP और RSS इसे सामाजिक खतरा बता रहे हैं, वहीं ओवैसी जैसे नेता सवाल कर रहे हैं कि बिना आंकड़ों और ठोस सबूतों के आखिर किस आधार पर कानून और बयान दिए जा रहे हैं।

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