नागा साधु महाकुंभ मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है क्योंकि ये सिर्फ कुंभ के दौरान दिखाई देते हैं। नागा साधु की रहस्यमय दुनिया है। कुंभ के बाद इन्हें देखना आम है।
यही कारण है कि हर कोई महाकुंभ में नागा साधुओं के जीवन, उनके इतिहास और श्रृंगार के बार में उनके बारे में जानना चाहता है। आपने नागा साधुओं को सिर्फ रुद्राक्ष की माला धारण किए देखा होगा। क्या आप जानते हैं कि नागा साधुओं को रुद्राक्ष की माला क्यों पहना जाता है?
नागा साधु महाकुंभ में रुद्राक्ष माला क्यों पहनते हैं?
नागा साधु अधिकतर नग्न रहते हैं। नागा साध्वी भस्म और रुद्राक्ष पहनती हैं। रुदाक्ष नागा साधुओं को कवच देता है। नागा साधु निरंतर घूमते हैं। नकारात्मक ऊर्जा उन्हें परेशान कर सकती है, क्योंकि कई जगह उनके लिए अनुकूल नहीं है।
महाकुंभ में भी करोड़ों लोग आते हैं, इसलिए नागा साधु अपने आप को बुरी ऊर्जा से बचाने के लिए रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं।
नागा साधुओं को इस पवित्र अवधि में अपनी भक्ति और तपस्या को और अधिक गहराई से निभाने में रुद्राक्ष माला की विशिष्ट चुंबकीय और ऊर्जा संतुलन गुणों की वजह से रुद्राक्ष माला साधुओं के साधना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
शिव का वरदान
नागा साधु के आराध्य देव शिव हैं, और रुद्राक्ष देवता का चमत्कारिक वरदान है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि शिव (रुद्र) के आंसुओं से यह हुआ है। कहते हैं कि शिव ने हजारों वर्षों तक आंखें बंद करके ध्यान में बैठे रहे। जब उन्होंने अपनी आंखें खोली, उनके नेत्रों से प्रसन्नता के आंसू बहे, जो पवित्र रुद्राक्ष बन गए। ये मोती शिव ने दुनिया को दी हैं।’रुद्राक्ष की माला शिव से गहरी आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है, जो साधुओं के गले में डाल दी जाती है।
रुद्राक्ष पहनने के फायदे
आमतौर पर चिंता, अवसाद और अनिद्रा ये सभी कारण हैं कि हमारे मन में बहुत अधिक विचार आने लगते हैं. रुद्राक्ष माला धारण करने या जपने से इन सभी समस्याओं का समाधान मिलता है, साथ ही मानसिक और शारीरिक पीड़ाएं भी दूर होती हैं।
