पाकिस्तान ने हाल ही में अपने इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद असिम मलिक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में नियुक्त किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के बाद तनाव चरम पर है।
जनरल असिम मलिक का सैन्य करियर
लेफ्टिनेंट जनरल असिम मलिक ने 30 सितंबर 2024 को ISI प्रमुख का पदभार संभाला। उन्होंने बलूचिस्तान में इन्फैंट्री डिवीजन और उत्तर-पश्चिमी वज़ीरिस्तान में इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली है। इसके अलावा, वे क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और इस्लामाबाद के नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में चीफ इंस्ट्रक्टर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिकी सैन्य अकादमी फोर्ट लेवनवर्थ और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से शिक्षा प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान में मजबूत नागरिक-सैन्य संबंधों का संकेत देती है।
भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्व
जनरल मलिक की नियुक्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ISI ने अतीत में कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में कथित रूप से भूमिका निभाई है।उनकी नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियां एकजुट होकर भारत के खिलाफ अपनी रणनीतियों को और मजबूत कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल मलिक और सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर के बीच करीबी संबंधों के कारण पाकिस्तान की सुरक्षा नीतियों में समन्वय बढ़ सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया और सुरक्षा उपाय
भारत ने कश्मीर में हुए हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया है और पाकिस्तान के साथ हवाई यातायात को बंद कर दिया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो भारत को मजबूरन कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।