अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार, 3 जनवरी 2026 को तड़के 4:21 बजे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पोस्ट के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक मीडिया में हलचल मच गई।
राष्ट्रपति ट्रंप की इस पोस्ट के करीब 10 मिनट बाद ही न्यूयॉर्क टाइम्स के व्हाइट हाउस रिपोर्टर टायलर पेजर ने उन्हें फोन किया। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने तीन रिंग के भीतर ही कॉल उठा लिया। दोनों के बीच बेहद संक्षिप्त लेकिन अहम बातचीत हुई, जो करीब 50 सेकंड चली।
पेजर ने बताया कि वेनेजुएला में मौजूद उनके सहयोगी पत्रकार अनातोली कुर्मानायेव ने एक पत्रकार समूह में संदेश भेजा था कि राजधानी कराकास में बमबारी की गई है। इस खबर के कारण शनिवार तड़के करीब 1 बजे उनकी नींद खुल गई थी। शुरुआती रिपोर्ट्स को देखते हुए उन्हें यह अंदेशा हो गया था कि इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका की भूमिका हो सकती है।
आधिकारिक पुष्टि कुछ घंटे बाद हुई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की कि मादुरो को पकड़ लिया गया है। पेजर के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की फोन उठाने की आदत पहले से ही काफी चर्चित रही है और वह अक्सर पत्रकारों के कॉल खुद रिसीव करते हैं।
पेजर ने कहा कि फोन पर राष्ट्रपति ने ‘हैलो’ कहा और उन्होंने बिना देरी किए सवाल पूछना शुरू कर दिया। उन्होंने खुद को न्यूयॉर्क टाइम्स से बताते हुए ऑपरेशन, गिरफ्तारी और आगे की योजना को लेकर सवाल किए। हालांकि राष्ट्रपति ने किसी भी सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। इसके बजाय उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर कुछ घंटों बाद होने वाली उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके बाद राष्ट्रपति ने कॉल समाप्त कर दी।
इस घटनाक्रम से परिचित सूत्रों के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका लाकर न्यूयॉर्क की एक जेल में रखा गया है। वहां उनके खिलाफ ड्रग तस्करी समेत कई गंभीर आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला में स्थिर और लोकतांत्रिक सरकार बनने तक वाशिंगटन वहां की शासन व्यवस्था को लेकर निर्णायक भूमिका निभाएगा।
फिलहाल वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने लैटिन अमेरिका की राजनीति के साथ-साथ अमेरिका की विदेश नीति को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

