नरेश मीणा जाएंगे जेल? एक बार फिर टोंक कोर्ट ने खारिज की हाईकोर्ट की जमानत – जानिए पूरी खबर

टोंक कोर्ट ने जमानत रद्द की; गिरफ्तारी वारंट जारी, मीणा ने फैसला स्वीकार कर आगे कानूनी रास्ता अपनाने का कहा।

राजस्थान की टोंक एससी-एसटी कोर्ट ने सोमवार को नरेश मीणा की हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द कर दी। अदालत ने फैसला इस आधार पर सुनाया कि जिन शर्तों पर उन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी, उन शर्तों का पालन नहीं किया गया। मामले का संबंध देवली उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम के साथ हुई थप्पड़कांड और उसके बाद आगजनी व हिंसा से जुड़ी एफआईआर नंबर 166/2024 से है।

नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक के जरिए टोंक कोर्ट में आवेदन देकर हाईकोर्ट द्वारा प्रदान की गई जमानत निरस्त करने की माँग की थी। सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन स्पष्ट है, इसीलिए जमानत खारिज की जाए। कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए जमानत निरस्त कर दी और उन्हें गिरफ्तार कर प्रस्तुत करने के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया।

यह मामला तब तूल पकड़ता है जब उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2025 को मीणा को जमानत दी थी और 14 जुलाई 2025 को वह टोंक जेल से रिहा हुए थे। अब जमानत रद्द होने के बाद पुलिस उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई करेगी और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और फैसले की कॉपी मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि वे जनता के हकों के लिए कानून के भीतर संघर्ष कर रहे हैं और यह कि सत्ता का दबाव उनकी समस्याओं का कारण रहा होगा। मीणा ने भाजपा पर भी कटाक्ष किया और कहा कि बड़ी गुनाह करने वाले नेता पार्टी में पहुँचकर मुक्त हो जाते हैं, जबकि उनकी आवाज़ को राजनीति का विरोध समझा जा रहा है।

मीणा ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों से मिलने जाना यदि जमानत का उल्लंघन माना गया तो यह लोकतंत्र की परिभाषा बदलने जैसा होगा। पुलिस ने उनके पिछले व्यवहार को जमानत शर्तों के उल्लंघन के रूप में पेश किया था। मामले की आगे की कानूनी सुनवाई और गिरफ्तारी की तिथियाँ अदालत से आदेश मिलने के बाद तय होंगी।

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