इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण और दुरुपयोग से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) वाले विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की समीक्षा शुरू कर दी है। मंत्रालय का कहना है कि कंपनी की ओर से भेजे गए स्पष्टीकरण की जांच की जा रही है और समीक्षा पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। इस मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को बताया कि MeitY ने इस मामले में Meta को नोटिस जारी किया था और कंपनी ने तय समयसीमा के भीतर शनिवार को अपना जवाब मंत्रालय को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उस जवाब का परीक्षण किया जा रहा है और उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि कंपनी के खिलाफ आगे किसी तरह की नियामकीय या कानूनी कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
दरअसल, हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन दिखाई दे रहे थे, जिनके जरिए कथित रूप से बाल यौन शोषण और दुरुपयोग से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSEAM) को बढ़ावा दिया जा रहा था या ऐसे कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही थी। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी करते हुए ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था। साथ ही कंपनी से पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
सरकार की ओर से जारी नोटिस के जवाब में Meta ने कहा कि वह अपने सभी प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाता है। कंपनी के अनुसार, इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिटेक्शन सिस्टम, एडवांस कंटेंट मॉडरेशन तकनीक और मजबूत विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। Meta ने यह भी कहा कि वह लगातार नई तकनीकों और सुरक्षा प्रणालियों में निवेश कर रही है ताकि इस प्रकार की अवैध सामग्री को प्लेटफॉर्म पर आने से पहले ही रोका जा सके।
हाल के वर्षों में भारत सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े नियमों को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाती रही है। खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा, अवैध सामग्री और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होने वाले दुरुपयोग के मामलों में सरकार कंपनियों से त्वरित कार्रवाई और प्रभावी निगरानी प्रणाली बनाए रखने की अपेक्षा करती है। ऐसे मामलों में यदि किसी प्लेटफॉर्म पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल सभी की नजर MeitY की समीक्षा पर टिकी हुई है। यदि मंत्रालय को Meta का जवाब संतोषजनक नहीं लगता है, तो सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों और अन्य लागू नियमों के तहत कंपनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि जवाब और उठाए गए कदम पर्याप्त पाए जाते हैं, तो सरकार आगे के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और अनुपालन संबंधी निर्देश भी जारी कर सकती है। यह मामला भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन बाल सुरक्षा को लेकर सरकार की बढ़ती सख्ती का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
