Manipur में राष्ट्रपति शासन के बाद Imphal में सुरक्षा कड़ी कर दी गई

पूर्वोत्तर राज्य Manipur में राष्ट्रपति शासन लागू होने और विधानसभा को निलंबित किए जाने के एक दिन बाद अब सभी की निगाहें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी है। यहां राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

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Manipur में लंबे समय से जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद शुक्रवार को राजधानी Imphal में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज्यपाल से रिपोर्ट मिलने के बाद राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने गुरुवार को Manipur में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। यह कदम N. Biren Singh द्वारा 9 फरवरी के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। उनका इस्तीफा हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हुआ था जिसने राज्य को लगभग दो साल तक परेशान किया था। संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लिए गए इस फैसले का मतलब है कि राज्य के प्रशासनिक कार्यों को अब राज्यपाल के माध्यम से सीधे राष्ट्रपति द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता

मुख्यमंत्री N. Biren Singh के इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई। यह निर्णय तब आया जब भाजपा अपने पूर्वोत्तर प्रभारी Sambit Patra और विधायकों के बीच कई दौर की चर्चाओं के बावजूद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर आम सहमति बनाने में विफल रही।

साल 2027 में विधानसभा के चुनाव

Manipur में भाजपा सरकार का नेतृत्व कर रहे Biren Singh ने लगभग 21 महीने की जातीय हिंसा के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिसमें अब तक 250 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। Manipur विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।

बहाल किया जा सकता है सदन

CM के इस्तीफा देने के बाद Manipur भाजपा अध्यक्ष A. shradha ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है और उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन को अभी भंग नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्थिति में सुधार होने के बाद सदन को बहाल किया जा सकता है।

कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने साधा निशाना

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा की यह Manipur पर शासन करने में भाजपा की पूरी तरह से असमर्थता की देर से की गई स्वीकारोक्ति है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “अब प्रधानमंत्री Modi Manipur के लिए अपनी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकते”। कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने सवाल पूछते हुए कहा, “क्या उन्होंने आखिरकार राज्य का दौरा करने और Manipur और भारत के लोगों को शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की अपनी योजना के बारे में बताने का मन बना लिया है”?

जल्द कराए जाएंगे चुनाव

इस बीच Manipur CPIM इकाई ने कहा की राष्ट्रपति शासन को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए और जल्द से जल्द नई चुनाव कराए जाने चाहिए। CPIM कि राज्य समिति के सचिव ने कहा कि पार्टी अन्य समान विचारधारा वाले लोगों के साथ राष्ट्रपति शासन के दौरान Manipur की क्षेत्रीय अखंडता के लिए खड़ी रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायकों के बीच सट्टा की स्वार्थी चाहत में राज्य को ऐसी स्थिति में ला खड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति शासन लागू होने की अवधि 6 महीने तक हो सकती है जो संसदीय अनुमोदन के अधीन है। इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार शासन की देखरेख करेगी और नई विधानसभा चुनने के लिए नए चुनाव बुलाई जा सकते हैं। Manipur में अशांति मुख्य रूप से बहुसंख्यक मैतेई समुदाय और कुकी जनजातियों के बीच संघर्ष से जुड़ी थी। आर्थिक लाभ, नौकरी कोटा और भूमि अधिकारों से संबंधित विवादों को लेकर तनाव बढ़ गया। हिंसा के परिणाम स्वरुप सैकड़ो लोग मारे गए और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए।

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