संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके जरिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश को कानून का रूप दिया जाएगा।
यह विधेयक उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। इस संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) भी शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं तेज बनाना है। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आने और लंबित मामलों के निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों की बड़ी संख्या न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौती रही है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो अध्यादेश की जगह इसे स्थायी कानूनी मान्यता मिल जाएगी। मानसून सत्र के दौरान इस पर चर्चा होने की संभावना है।
