घी एक रामबाण उपाए है, आचार्य बालकृष्ण से इसका उपयोग कैसे करें?

हमारे देश में घी पूजा से लेकर भोजन में प्रयोग किया जाता है। पौष्टिक गुणों से भरपूर घी सेहत को बेहतर बनाता है। घी में विटामिन-के, विटामिन-ए, विटामिन-डी, कैल्शियम, पोटेशियम और फास्फोरस की पर्याप्त मात्रा होती है। यह आंतों की सेहत के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी सशक्त बनाता है। घी बोन्स को मजबूत बनाता है।

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हमारे देश में घी पूजा से लेकर भोजन में प्रयोग किया जाता है। पौष्टिक गुणों से भरपूर घी सेहत को बेहतर बनाता है। घी में विटामिन-के, विटामिन-ए, विटामिन-डी, कैल्शियम, पोटेशियम और फास्फोरस की पर्याप्त मात्रा होती है। यह आंतों की सेहत के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी सशक्त बनाता है। घी बोन्स को मजबूत बनाता है। विशेषज्ञ एक चम्मच घी हर दिन खाने की सलाह देते हैं। घी को भारतीय घरों में खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

विशेषज्ञ एक चम्मच घी हर दिन खाने की सलाह देते हैं। घी को भारतीय घरों में खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। खासकर दाल फ्राई करते समय। आयुर्वेद में घी के फायदों (Ghee Ke Fayde) का उल्लेख है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि घी न केवल पूजा के लिए बल्कि सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है। Ghee Ke Upaya सेहत से जुड़े कई रोगों को दूर करने में मदद करता है। आइए आचार्य बालकृष्ण की शलाका में घी के स्वास्थ्य लाभों को जानें।

गाय का घी दिल की बीमारी में बहुत अच्छा माना जाता है। गाय का घी खाने से भी कोलेस्ट्राल बढ़ने का खतरा नहीं होता। गाय का घी सबसे अच्छा फैट माना जाता है। इससे डाइजेशन सुधरता है। घी में पकाने के बाद कई दवा अधिक प्रभावी होती हैं। एक चम्मच गाय का घी दूध में मिलाकर बच्चों को आंखों में परेशानी का सामना कर रहे बच्चों को पिलाने से फायदा होता है।घी का नियमित सेवन मेमोरी पावर बढ़ाता है। घी भी ब्रेन के लिए अच्छा है।

घी भी बॉडी पेन को कम करने में मदद करता है। दर्द वाली जगह पर गाय का पुराना घी लगाने से दर्द कम होता है। सर्दी में बलगम जमा होने पर सीने पर पुराना घी लगाना चाहिए। घी सबसे हेल्दी फैट है। इससे शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रॉल होता है। अन्य फैट की तरह, घी दिल की बीमारी का कारण नहीं बनता। घी खाने से आंत स्वस्थ रहता है। पुराने समय से भोजन से पहले एक चम्मच घी खाया जाता था, जिससे आंत बेहतर काम करती थी और कैंसर और अल्सर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता था।

 

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