भारतीय शेयर बाजार आज कमजोर शुरुआत की ओर संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों और विदेशी घटनाक्रमों के असर के बीच निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है। घरेलू वायदा संकेतकों में भी हल्की गिरावट देखी जा रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि कारोबारी सत्र की शुरुआत में दबाव बना रह सकता है। बीते कारोबारी दिन बाजार पहले ही गिरावट के साथ बंद हुआ था और अब वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के कारण निवेशक किसी बड़े जोखिम से बचते नजर आ रहे हैं।
Sensex और Nifty 50 दोनों ही मंगलवार को करीब आधा प्रतिशत तक टूटकर बंद हुए थे। सेंसेक्स 436 अंकों की गिरावट के साथ 84,666 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 120 अंकों से अधिक टूटकर 25,839 के करीब आ गया। यह गिरावट ऐसे समय पर आई, जब वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक अमेरिका के महत्वपूर्ण मौद्रिक संकेतों को लेकर सतर्क हैं।
घरेलू बाजार के लिए शुरुआती संकेत Gift Nifty से भी कमजोर मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी पिछले बंद स्तर से करीब 58 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि आज बाजार की शुरुआत नकारात्मक रह सकती है। इसका असर शुरुआती कारोबार में आईटी, बैंकिंग और मेटल जैसे सेक्टरों पर दिखाई दे सकता है, जहां पहले से ही दबाव बना हुआ है।
तकनीकी नजरिए से देखा जाए तो सेंसेक्स फिलहाल निचले स्तरों पर दबाव में बना हुआ है। चार्ट पैटर्न यह संकेत दे रहे हैं कि बाजार में कमजोरी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, हालांकि कुछ स्तरों पर तकनीकी आधार पर हल्की रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है। 84,400 के आसपास का स्तर सेंसेक्स के लिए तत्काल सहारा माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो थोड़ी बहुत राहत वाली तेजी देखी जा सकती है। वहीं ऊपर की ओर 85,000 से 85,200 के बीच का इलाका एक मजबूत रुकावट के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों को पार करना फिलहाल आसान नहीं दिख रहा। दूसरी ओर, यदि सेंसेक्स 84,400 के नीचे फिसलता है, तो दबाव और बढ़ सकता है और यह 84,000 के स्तर तक फिसल सकता है।
डेरिवेटिव बाजार के संकेत भी फिलहाल सतर्कता की ओर इशारा कर रहे हैं। कॉल ऑप्शन में भारी मात्रा में नए सौदों का बनना यह दर्शाता है कि ऊपर की ओर जाने पर बाजार को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। खास तौर पर 26,000 के स्ट्राइक प्राइस पर बड़ी संख्या में कॉल कॉन्ट्रैक्ट जमा हुए हैं, जिससे यह स्तर निफ्टी के लिए एक मजबूत रुकावट के रूप में उभरता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर, 25,500 के पास पुट ऑप्शन में मजबूत पकड़ बनी हुई है, जो इस स्तर को एक अहम सहारे के रूप में स्थापित करता है। पुट-कॉल अनुपात में हल्की बढ़ोतरी यह भी दर्शाती है कि बाजार में बचाव की रणनीति अपनाई जा रही है और निवेशक फिलहाल आक्रामक रुख से दूरी बनाए हुए हैं।
Nifty 50 के चार्ट पर हालिया मोमबत्ती संरचना साफ तौर पर अनिश्चितता का संकेत दे रही है। हालिया दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी एक अहम सपोर्ट जोन के पास संघर्ष करता नजर आ रहा है। 25,700 का स्तर फिलहाल निफ्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इस स्तर से टिकाऊ मजबूती मिलती है, तो आने वाले सत्रों में निफ्टी 26,100 से 26,200 की ओर बढ़ सकता है। हालांकि यदि यह सहारा टूटता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है और निचले स्तरों की ओर फिसलन देखने को मिल सकती है।
तकनीकी रूप से निफ्टी पर 26,000 का स्तर एक बड़ी बाधा बना हुआ है। यह स्तर न केवल मनोवैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मूविंग एवरेज के लिहाज से भी बाजार के लिए एक कठिन क्षेत्र है। जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर मजबूती के साथ बंद नहीं होता, तब तक इसमें तेज और टिकाऊ तेजी की उम्मीद करना फिलहाल जल्दबाजी माना जा सकता है। नीचे की ओर 25,670 से 25,500 का इलाका निफ्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। बाजार की दिशा भी काफी हद तक इन्हीं स्तरों पर तय होती नजर आएगी।
Bank Nifty की बात करें तो इसमें भी हाल के दिनों में ऊपरी स्तरों से दबाव देखने को मिला है। मंगलवार को बैंक निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 59,222 के करीब बंद हुआ। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दौर अभी जारी है। बैंकिंग शेयरों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने लाभ बुक करना शुरू कर दिया है, जिससे सूचकांक पर अस्थायी दबाव बना हुआ है।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो बैंक निफ्टी के लिए 58,800 से 58,700 का क्षेत्र फिलहाल एक मजबूत सहारे के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर कायम रहता है, तो बैंक निफ्टी में फिर से मजबूती लौट सकती है और यह एक बार फिर 59,500 से 59,700 की ओर बढ़ सकता है। वहीं यदि 58,800 का स्तर टूटता है, तो गिरावट बढ़कर 58,300 से 58,000 तक खिंच सकती है। ऊपर की ओर 60,000 का स्तर फिलहाल एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बाधा बना हुआ है, जिसे पार करना अगले बड़े ट्रेंड के लिए जरूरी होगा।
वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में पूरी स्पष्टता का अभाव बना हुआ है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक Federal Reserve से जुड़े संकेतों को लेकर दुनिया भर के बाजार असमंजस में दिखाई दे रहे हैं। ब्याज दरों, महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर आने वाले संकेतों का सीधा असर उभरते बाजारों पर भी पड़ता है। इसी कारण विदेशी निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और चुनिंदा शेयरों में ही सीमित गतिविधि देखने को मिल रही है।
घरेलू स्तर पर भी निवेशक फिलहाल दोहरी रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं। एक तरफ वे गिरावट में चुनिंदा मजबूत शेयरों में खरीदारी की संभावना तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का सिलसिला भी जारी है। आईटी, एफएमसीजी और फार्मा जैसे रक्षात्मक सेक्टरों में सीमित स्थिरता देखने को मिल सकती है, जबकि बैंकिंग, मेटल और रियल्टी जैसे चक्रीय सेक्टरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
कुल मिलाकर आज का कारोबारी सत्र बेहद सतर्क रुख के साथ शुरू होने की संभावना है। शुरुआती घंटों में दबाव रह सकता है, लेकिन जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ेगा, वैश्विक बाजारों की चाल और घरेलू संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए फिलहाल यही रणनीति बेहतर मानी जा रही है कि वे भारी उतार-चढ़ाव के बीच जल्दबाजी से बचें और मजबूत स्तरों के ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन का इंतजार करें। तकनीकी स्तरों को ध्यान में रखते हुए ही किसी नए सौदे में प्रवेश करना अधिक सुरक्षित माना जा सकता है।
आने वाले सत्रों में सेंसेक्स, निफ्टी और बैंक निफ्टी के प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल माहौल सतर्कता से भरा हुआ है और निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक परिदृश्य पर भी टिकी हुई है।
*Disclaimer: ऊपर दिए गए विचार और सुझाव व्यक्तिगत एनालिस्ट या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, न कि Business Headline के। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।
