Gyanesh Kumar नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त हुए

Gyanesh Kumar 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इस साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव और 2026 में Kerala,Tamilnadu, Puducherry, और West Bengal विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा।

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प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली तीन सदस्य चयन समिति ने सोमवार शाम को Gyanesh Kumar के नाम की सिफारिश की जिस पर राष्ट्रपति Draupadi Murmu ने मोहर लगाई।Rajiv Kumar 18 फरवरी यानी मंगलवार को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। Gyanesh Kumar को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बनाया गया है। Gyanesh Kumar 19 फरवरी को पदभार ग्रहण करेंगे। इस साल Bihar में विधानसभा चुनाव होना है। 2026 में West Bengal, Kerala, Tamilnadu, Assam जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में Gyanesh Kumar इन चुनावों में प्रभारी होंगे। चुनाव आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है।

कौन हैं Gyanesh Kumar

केरल कैडर के 1988 बैच के IAS अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय का हिस्सा थे। उन्होंने 2019 में Jammu Kashmir में अनुच्छेद 370 को खत्म करने वाले विधेयक का मसौदा तैयार करने में मदद की थी। वह मई 2022 से Amit Shah के नेतृत्व वाले मंत्रालय में सचिव थे। केरल SC-ST डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। चुनाव आयुक्त बनने से पहले गृह मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रहे और संसदीय कार्य मंत्रालय में सेक्रेटरी रहे। UPA सरकार के दौरान रक्षा मंत्रालय में भी तैनात रह चुके हैं। उनके पास गृह मंत्रालय में काम करने का 5 सालों का तजुर्बा है। पहले मई 2016 से सितंबर 2018 तक संयुक्त सचिव के रूप में और फिर सितंबर 2018 से अप्रैल 2021 तक अतिरिक्त सचिव के रूप में उन्होंने काम किया था। Gyanesh Kumar ने तीन तलाक को खत्म करने से जुड़ी मसौदा समिति में भी अहम भूमिका निभाई है। गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान संबंधित दस्तावेजों को संभालने की जिम्मेदारी भी निभाई है।

ऐसे बने मुख्य चुनाव आयुक्त

बता दें कि सोमवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi की अगुवाई में हुई बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर Gyanesh Kumar के नाम पर मोहर लगी। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सर्च कमेटी ने चयन समिति को पांच नाम सौंपे। इनमें से किसी को मुख्य चुनाव आयुक्त चुना जाना था। समिति ने परंपरा के आधार पर सबसे सीनियर चुनाव आयुक्त Gyanesh का नाम CEC पद के लिए प्रस्तावित कर दिया।

राम मंदिर मामले से भी जुड़े थे

अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान Gyanesh Kumar की भूमिका बेहद अहम थी। अगस्त 2019 में हुए गृह मंत्रालय में Kashmir डिवीजन के संयुक्त सचिव थे। इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री Amit Shah के साथ मिलकर काम किया। इस संवेदनशील मामले को सुलझाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। 2020 में Gyanesh Kumar को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया। उन्हें अयोध्या मामले से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन भी शामिल था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से सभी कार्य उनकी देखरेख में हुए। यह एक और महत्वपूर्ण भूमिका थी जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया।

Rahul Gandhi ने डिसेंट नोट किया था जारी

चयन समिति में प्रधानमंत्री Modi के अलावा गृहमंत्री Amit Shah और नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi हैं। बैठक में Rahul Gandhi ने चयन प्रक्रिया डिले करने सहित कुछ बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा लेकिन बहुमत के आधार पर उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया गया। बैठक के बाद Rahul Gandhi ने डीसेंट नोट जारी किया था। Rahul ने कहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है इसलिए यह बैठक नहीं होनी चाहिए थी।

कैसे होता है CEC का चयन

मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल वैसे तो 6 वर्ष का होता है लेकिन सेवानिवृत्ति के लिए निर्धारित 65 वर्ष की उम्र पूरी करते ही कई बार उन्हें पद छोड़ना पड़ता है। Gyanesh Kumar एक नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। इसके पहले प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा CEC नियुक्त किए जाते थे। सामान्य तौर सबसे सीनियर चुनाव आयुक्त को ही मौजूदा CEC का उत्तराधिकारी चुन लिया जाता था।

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