भारत का आईटी सेक्टर लंबे समय से रोजगार देने वाला एक मजबूत क्षेत्र रहा है। लेकिन 2025 में यह सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, इस साल के अंत तक 55,000 से 60,000 कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। यह आंकड़ा पिछले दो सालों में हुई छंटनी से दोगुना है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 और 2024 के बीच लगभग 25,000 लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। अब 2025 में यह संख्या और बढ़ सकती है। बड़ी आईटी कंपनियां जैसे कि TCS और Accenture पहले ही बड़े स्तर पर छंटनी का ऐलान कर चुकी हैं।
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TCS का प्लान है कि मार्च 2026 तक अपने टोटल स्टाफ का 2% यानी करीब 12,000 लोगों की छंटनी की जाएगी।
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Accenture ने हाल ही में जून से अगस्त के बीच 11,000 कर्मचारियों को निकाला है।
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इसके अलावा, कई कंपनियां बिना किसी सार्वजनिक ऐलान के भी गुपचुप तरीके से कर्मचारियों को निकाल रही हैं।
छंटनी की मुख्य वजहें
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के कारण कंपनियों को अब कम कर्मचारियों की जरूरत है।
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कॉस्ट कटिंग यानी लागत में कटौती करने के लिए कंपनियां टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही हैं।
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अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी, H-1B वीजा की बढ़ती लागत, और भूराजनीतिक तनाव भी इसके पीछे बड़ी वजहें हैं।
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डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में सिर्फ उन्हीं कंपनियों को फायदा हो रहा है जो क्लाउड, डेटा एनालिटिक्स और एआई जैसी नई तकनीकों में मजबूत हैं।
कैसे की जा रही है छंटनी?
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कई कंपनियां खराब परफॉर्मेंस का हवाला देकर लोगों को निकाल रही हैं।
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कुछ जगहों पर प्रमोशन रोककर या वॉलेंट्री रेजिग्नेशन (स्वेच्छा से इस्तीफा) के लिए कहा जा रहा है।
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TeamLease Digital की CEO नीति शर्मा का अनुमान है कि 2025 के अंत तक छंटनी से प्रभावित लोगों की संख्या 60,000 तक पहुंच सकती है।
भविष्य की राह क्या है?
आईटी सेक्टर में भविष्य उन्हीं लोगों का है जो नए स्किल्स जैसे AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग में माहिर हैं। पारंपरिक स्किल्स रखने वाले कर्मचारियों के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं।
इस कठिन समय में अपस्किलिंग और री-स्किलिंग ही एकमात्र रास्ता है, जिससे आईटी प्रोफेशनल्स खुद को इस बदलते माहौल के अनुसार ढाल सकते हैं।

