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क्या यही है ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा? जयपुर की सड़क पर हुआ हादसा सिर्फ दुर्घटना नहीं, व्यवस्था पर सवाल है

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जयपुर के एयरपोर्ट रोड पर शनिवार रात हुई घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि इसने राजस्थान की कानून-व्यवस्था, वीआईपी संस्कृति और सरकारी जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, “राजस्थान पुलिस” लिखी एक स्कॉर्पियो तेज रफ्तार में डिवाइडर पार कर गलत दिशा में पहुंची और एक कार से टकरा गई। इसके बाद मौके पर भारी हंगामा हुआ, वाहन पर पथराव हुआ और उसमें से कथित तौर पर बीयर के कैन और बोतलें मिलने के दावे भी सामने आए। इन सभी दावों की आधिकारिक जांच अभी जारी है और तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। लेकिन जिन परिस्थितियों में यह घटना हुई, वे सरकार से कई सवाल पूछने के लिए पर्याप्त हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा लगातार सुशासन, कानून का राज और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकारी पहचान वाला वाहन सड़क पर इस तरह की घटना में शामिल पाया जाता है, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता से होगी या फिर यह भी कई अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

यदि किसी सरकारी वाहन पर “राजस्थान पुलिस” लिखा हो, पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगी हो और वह दुर्घटना का हिस्सा बने, तो जनता का भरोसा प्रभावित होना तय है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वाहन किसके उपयोग में था, उस समय उसमें कौन-कौन मौजूद थे, क्या वाहन का उपयोग नियमों के अनुरूप हो रहा था और क्या सभी आवश्यक अनुमतियां वैध थीं। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो क्या संबंधित लोगों के खिलाफ वही कार्रवाई होगी जो एक आम नागरिक के साथ होती?

घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे। यदि यह सही है, तो यह भी जांच का विषय है कि भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में इतनी देरी क्यों हुई। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि किसी भी परिस्थिति में भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेना, पथराव करना या सरकारी अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।

सबसे बड़ा प्रश्न मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार से है। क्या सरकार इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराएगी? क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? क्या यदि किसी पुलिसकर्मी, अधिकारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी पक्षपात के कार्रवाई होगी? जनता को इन सवालों के जवाब चाहिए।

लोकतांत्रिक शासन में जवाबदेही केवल विपक्ष के सवालों का जवाब देने तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर उस घटना पर पारदर्शी कार्रवाई करना भी सरकार का दायित्व है, जो जनता के विश्वास को प्रभावित करती है। यह मामला भी उसी कसौटी पर सरकार की परीक्षा है। यदि सरकार निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करती है, तो जनता का भरोसा मजबूत होगा। लेकिन यदि इस मामले में भी अस्पष्टता या ढिलाई बरती जाती है, तो सरकार की कानून-व्यवस्था और सुशासन के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक होगा।

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