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विवादों में घिरा नया वक्फ कानूनः RJD जाएगी सुप्रीम कोर्ट, 11 अप्रैल से मुस्लिम संगठनों का देशव्यापी विरोध

 वक्फ संपत्तियों पर नया कानून विवादों में, RJD सुप्रीम कोर्ट जाएगी और मुस्लिम संगठन करेंगे देशभर में प्रदर्शन.

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देश में वक्फ संपत्तियों को लेकर लागू किया गया नया वक्फ कानून अब विवादों के घेरे में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस कानून को संविधान विरोधी बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद मनोज झा और पार्टी नेता फैयाज अहमद आज सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।

RJD का विरोध 

RJD का कहना है कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे देश के सामाजिक सौहार्द पर गहरा असर पड़ेगा। पार्टी का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पहले ही इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में छह याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं।

क्या है मामला?

सरकार द्वारा हाल ही में पास किया गया वक्फ संशोधन कानून कई समुदायों, विशेष रूप से मुस्लिम समाज में चिंता का विषय बना हुआ है। आरोप है कि इस कानून के जरिए वक्फ बोर्ड को अत्यधिक अधिकार दिए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों की निजी संपत्तियों पर भी वक्फ का दावा किया जा सकता है।

RJD के नेता Manoj Jha ने कहा:

“हम इस कानून के उन प्रावधानों को अदालत में चुनौती देंगे जो संविधान के अनुच्छेदों और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। यह कानून न सिर्फ एक समुदाय को प्रभावित करता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को भी आहत करता है।”

 

मुस्लिम संगठनों का ऐलान: 11 अप्रैल से देशव्यापी प्रदर्शन

इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 11 अप्रैल से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

AIMPLB के मुताबिक, वक्फ संशोधन कानून मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक आज़ादी पर हमला है। संगठन का कहना है कि यह कानून एकतरफा है और इसमें किसी समुदाय की भावनाओं या राय को शामिल नहीं किया गया है।

 

आगे की रणनीति

RJD के साथ-साथ अन्य विपक्षी दल और मुस्लिम संगठनों ने भी संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर संसद और सड़क दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ेंगे। इसके अलावा, कई और याचिकाएं आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में देश में एक बड़ा संवैधानिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन सकता है।

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