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ट्रंप का एक बयान और बिखबर गया भारतीय शेयर बाजार! – जानिए पूरी खबर

ट्रंप के ईरान युद्ध बयान से एशियाई बाजार 4% तक टूटे, भारत में सेंसेक्स 1,400+ अंक गिरा। तेल चढ़ा, बॉन्ड दबाव, रुपया कमजोर। निवेशकों के लिए नई रणनीति ज़रूरी।

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर “अगले दो–तीन हफ्तों में बहुत कड़ा हमला” करने और संघर्ष को खत्म किए जाने की समयसीमा न देने वाले बयान ने वैश्विक निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया। कोरिया से जापान तक एशियाई बाजारों में 4% तक की गिरावट देखी गई, जबकि भारत भी इस उथल‑पुथल से बचा नहीं रहा और पिछले दिन की तेजी के बाद एक ही सेशन में जबरदस्त बिकवाली का दौर चला।

सुबह 11:08 बजे तक सेंसेक्स 1.95% या 1,426.14 अंक गिरकर 71,708.18 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 1.94% या 439.10 अंक टूटकर 22,240.30 पॉइंट पर चल रहा था। इस दौरान सेंसेक्स का मार्केट कैप 8,61,022.83 लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 872 अंक टूटकर 72,262 पर आ गया था और कुछ ही सेकंड में करीब 1,400 अंक की गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 296 अंक लुढ़ककर 22,383 पर आ गया। यह भारी गिरावट ने निवेशकों के करोड़ों रुपये एक ही सेशन में उड़ा दिए और दलाल स्ट्रीट पर डर का माहौल बना दिया।

तेल, बॉन्ड और रुपये पर दबाव

ट्रंप के युद्ध बयान का सबसे प्रत्यक्ष असर कमोडिटी और बॉन्ड मार्केट पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 4.64% बढ़कर 105.85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड भी 4.36% के करीब रहा, जिससे इक्विटी निवेशकों का भरोसा और डगमगा गया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने चेतावनी दी कि ट्रंप के बयान पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे अपने रुख में किसी भी वक्त बदलाव कर सकते हैं।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवार्ष वकिल के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी लगभग बंद है, जिससे रोज 10–15 मिलियन बैरल तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। यह इतिहास का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बन सकता है। नोमुरा की आर्थिक विशेषज्ञ सोनल वर्मा ने पूर्वानुमान दिया कि अगर ईरान के समर्थन वाले हौती विद्रोही रेड सी शिपिंग को निशाना बनाते हैं, तो बाब‑अल‑मंदेब और स्वेज नहर के ज़रिए चलने वाले ग्लोबल ट्रेड पर दोहरा दबाव पड़ेगा। वैकल्पिक केप ऑफ गुड होप रूट लंबा और महंगा साबित होगा, जो वैश्विक इनपुट लागत बढ़ा देगा।

भारतीय बाजार पर बड़ा हमला

बीएसई सेंसेक्स बड़े शेयरों पर ज़ोरदार दबाव देखने को मिला। सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और इटरनल जैसे शेयर 3–4% तक टूट गए। एसबीआई, ट्रेंट और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी लगभग 3% की गिरावट दर्ज हुई। बड़े इंडेक्स में केवल एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ मामूली बढ़त के साथ एकमात्र गेनर रहा।

रुपये पर भी दबाव दिख रहा है। विजयकुमार ने बताया कि 1 अप्रैल को विदेशी निवेशकों ने 8,331 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि महंगा कच्चा तेल, बढ़ता व्यापार घाटा और घटती रेमिटेंस ने मिलकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। अगर ईरान‑अमेरिका संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह एक गंभीर झटका बन सकता है, जिससे चालू खाता घाटा और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषक निवेशकों से जोखिम घटाकर पोर्टफोलियो की समीक्षा करने की सलाह दे रहे हैं।

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