राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के प्रमुख चौराहों और सरकारी दफ्तरों के आसपास अचानक “शिक्षा मंत्री लापता हैं” लिखे पोस्टर नजर आने लगे। नारायण सिंह सर्किल, अल्बर्ट हॉल, ओटीएस चौराहा और शिक्षा संकुल जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में लगे इन पोस्टरों ने न सिर्फ राहगीरों का ध्यान खींचा, बल्कि प्रदेश के शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल खड़े कर दिए।
यह विरोध प्रदर्शन 9 वर्षीय अमायरा के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के विरोध में किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद शिक्षा मंत्री और विभाग की ओर से अब तक केवल औपचारिकताएं ही निभाई गई हैं।
‘मंत्री पिछले दो साल से लापता हैं’
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सामाजिक संस्था ‘परिवर्तन’ के संस्थापक आशुतोष रांका ने किया। उन्होंने सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री मदन सिंह दिलावर पर हमला बोलते हुए कहा कि “राज्य के शिक्षा मंत्री पिछले दो साल से लापता हैं। इतने बड़े-बड़े कांड हो गए, लेकिन मंत्री कहीं नजर नहीं आए।”
रांका ने आरोप लगाया कि अमायरा केस के अलावा झालावाड़ के स्कूल हादसे, दूध पाउडर सप्लाई में गड़बड़ी, बच्चों को समय पर किताबें न मिलना, शिक्षकों की समस्याएं और स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की बदहाली जैसे कई मामलों में मंत्री की चुप्पी साफ दिखाई देती है।
उनका कहना था कि जब राज्य की शिक्षा व्यवस्था संकट में है, तब मंत्री का यूं ‘गायब’ रहना इस बात का संकेत है कि वे अपने पद की जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
नीरजा मोदी स्कूल पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सामाजिक कार्यकर्ता रेखा शर्मा ने अमायरा केस की गंभीरता को सामने रखते हुए बताया कि जयपुर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल में लगातार बुलिंग से परेशान होकर 9 साल की बच्ची अमायरा ने स्कूल की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। इस दर्दनाक घटना को अब 38 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है।
रेखा शर्मा ने कहा कि इस मामले में CBSE की रिपोर्ट में स्कूल की लापरवाही सामने आ चुकी है, इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। सोशल मीडिया पर #Justiceforamaira हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और मंत्री अब भी खामोश हैं।
‘पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था ठप’
संस्था की संस्थापक सदस्य शशि मीणा ने आरोप लगाया कि पूरे राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है। उन्होंने कहा कि न स्कूलों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है, न शिक्षकों की समस्याएं सुनी जा रही हैं और न ही छात्रों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जा रहा है।
शशि मीणा ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “आज पूरे राजस्थान के मां-बाप शिक्षा मंत्री को ढूंढ रहे हैं, क्योंकि सवाल बच्चों के भविष्य का है।” पोस्टरों में भी यही संदेश लिखा गया है—“सूचना मिलने पर तुरंत संपर्क करें।”
72 घंटे का अल्टीमेटम
परिवर्तन संस्था ने शिक्षा विभाग और मंत्री को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। आशुतोष रांका ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर नीरजा मोदी स्कूल के खिलाफ सख्त और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे जयपुर शहर में और भी व्यापक स्तर पर “शिक्षा मंत्री लापता” के पोस्टर लगाए जाएंगे।
उनका कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ अमायरा को न्याय दिलाने की मांग नहीं है, बल्कि यह निजी स्कूलों की मनमानी, शिक्षा विभाग की लापरवाही और सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक मजबूत आवाज है।
जनता में बढ़ता रोष
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जयपुर में अभिभावकों और आम लोगों के बीच नाराजगी तेजी से बढ़ रही है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब एक मासूम बच्ची की मौत के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं और शिक्षा मंत्री सामने आकर जवाब नहीं दे रहे, तो आखिर भरोसा किस पर किया जाए?
अब निगाहें अगले 72 घंटों पर टिकी हैं कि क्या सरकार और शिक्षा विभाग कोई ठोस कदम उठाएंगे या विरोध का यह स्वर और तेज होगा।
