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वसुंधरा राजे के बयान पर राजस्थान की सियासत गरमाई, डोटासरा बोले- बीजेपी की अंदरूनी कलह आई सामने

राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हालिया बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित अमृत महोत्सव समारोह में दोस्ती-दुश्मनी और सिकंदर-पोरस का उदाहरण देते हुए राजनीति में संवाद और मर्यादा बनाए रखने की उनकी नसीहत अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। कांग्रेस ने इस बयान को भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का संकेत बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने वसुंधरा राजे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके शब्दों में बीजेपी की अंदरूनी स्थिति साफ दिखाई देती है। उन्होंने दावा किया कि जब राजे सदन में बोल रही थीं तो उनकी नजरें कभी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर तो कभी पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ की तरफ जा रही थीं। डोटासरा ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अपनी ही पार्टी की कार्यशैली और नेताओं पर व्यंग्य किया।

हालांकि डोटासरा ने यह भी कहा कि राजनीति में व्यक्तिगत रिश्तों और मर्यादा को लेकर वसुंधरा राजे ने जो बात कही, उससे असहमति नहीं हो सकती। उनके अनुसार राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत दुश्मनी लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं मानी जा सकती।

इसी दौरान डोटासरा ने राज्य सरकार की तबादला नीति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की तबादला प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। जरूरतमंद कर्मचारियों के तबादले लंबित पड़े हैं, जबकि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों को मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था से केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि बीजेपी के कई कार्यकर्ता और नेता भी असंतुष्ट हैं।

स्वास्थ्य विभाग को लेकर भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर हमला बोला। ओबीसी मोर्चे की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनकी तुलना महमूद गजनवी से कर दी। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की बजाय अन्य प्राथमिकताओं में उलझी हुई है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, वसुंधरा राजे ने विधानसभा के अमृत महोत्सव समारोह में अपने संबोधन के दौरान कहा था कि राजनीति में विचारों का संघर्ष होना चाहिए, लेकिन रिश्तों में कटुता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और हरिदेव जोशी के बीच राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बने रहे व्यक्तिगत सम्मान का उल्लेख किया। साथ ही सिकंदर और पोरस की कहानी सुनाते हुए उन्होंने विरोधियों के प्रति सम्मान और गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया था।

फिलहाल डोटासरा के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि वसुंधरा राजे के बयान के बाद बीजेपी के भीतर संभावित अंतर्कलह और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष इसे सत्तारूढ़ दल की आंतरिक स्थिति से जोड़कर देख रहा है, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।

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