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शरद पवार ने रिश्तेदारों संग बारामती में मनाया ‘भाऊ बीज’, अजित पवार रहे इस बार अनुपस्थित

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Pawar

बारामती – महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले, एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने रविवार, 3 नवंबर को अपने परिवार के साथ ‘भाऊ बीज’ का त्योहार मनाया। इस अवसर पर पवार पुणे जिले के बारामती में अपने परिजनों और समर्थकों के साथ एकत्रित हुए, लेकिन उनके भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार इस मौके पर अनुपस्थित रहे।

शरद पवार की बेटी और बारामती से लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि समर्थक और रिश्तेदार एनसीपी प्रमुख का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं। यह समारोह विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि एनसीपी का विभाजन पिछले साल जुलाई में हुआ था, जब अजित पवार और कई विधायक शरद पवार की इच्छा के विरुद्ध एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे।

अजित पवार की अनुपस्थिति

पिछले साल ‘भाऊ बीज’ कार्यक्रम में अजित पवार भी शामिल हुए थे, लेकिन इस साल उन्होंने अपने पैतृक गांव कटेवाडी में एक अलग कार्यक्रम आयोजित किया। यह कदम पारिवारिक परंपरा को तोड़ते हुए नजर आता है, जिसमें आमतौर पर परिवार के सभी सदस्य एक साथ त्योहार मनाते हैं। इसके अतिरिक्त, निर्वाचन आयोग ने बाद में अजित पवार के गुट को पार्टी का नाम और ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न दे दिया, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट का नाम एनसीपी (शरद चंद्र पवार) रखा गया है।

चुनावी हलचल

शरद पवार का यह उत्सव गोविंदबाग स्थित निवास पर हुआ, और यह दिवाली से संबंधित उत्सव विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मनाए जा रहे हैं। बारामती में इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है, जहां अजित पवार और उनके भतीजे, एनसीपी (एसपी) के उम्मीदवार युगेंद्र पवार के बीच प्रतिस्पर्धा है। पिछले लोकसभा चुनाव में, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का मुकाबला सुप्रिया सुले से हुआ था, जिसमें सुले ने आसानी से जीत हासिल की थी।

चुनाव की तारीखें

महाराष्ट्र में सभी 288 विधानसभा सीटों पर एक ही फेज में चुनाव 20 नवंबर को होंगे, और चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। शरद पवार का ‘भाऊ बीज’ समारोह और अजित पवार की अनुपस्थिति इस चुनावी माहौल में कई सवाल उठाते हैं, जो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

इस प्रकार, यह त्योहार केवल पारिवारिक एकता का प्रतीक नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

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