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Sunday, August 31, 2025

अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया

अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और इसकी मिलिटेंट विंग मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया। पाकिस्तान ने फैसले का स्वागत किया, BLA पर बलूचिस्तान में कई हमलों का आरोप।

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अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मिलिटेंट विंग मजीद ब्रिगेड को आधिकारिक रूप से विदेशी आतंकी संगठन (Foreign Terrorist Organisation – FTO) घोषित कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) ने मंगलवार को यह ऐलान किया। पाकिस्तान ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे देश के अशांत दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में आतंकवाद पर काबू पाने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

BLA को 2019 में अमेरिका ने स्पेशली डिज़िग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (SDGT) की सूची में डाला था, लेकिन इस बार मजीद ब्रिगेड को भी BLA के उपनाम (alias) के रूप में शामिल करते हुए उसकी आतंकी पहचान को मजबूत किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दोनों संगठन पिछले वर्षों में लगातार हिंसक हमलों में लिप्त रहे हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “आज की कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आतंकी संगठन के रूप में नामित करना हमारे संघर्ष में अहम हथियार है और इससे आतंकी गतिविधियों को मिलने वाले समर्थन पर प्रभावी तरीके से रोक लगती है।”

यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर वॉशिंगटन के दौरे पर हैं। इस दौरे के दौरान अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बलूचिस्तान में तेल संसाधनों के विकास और द्विपक्षीय टैरिफ में ढील देने को लेकर एक नए व्यापार समझौते पर भी सहमति बनी है।

2019 में SDGT सूची में शामिल होने के बाद भी BLA ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली, जिनमें मजीद ब्रिगेड द्वारा किए गए हमले भी शामिल हैं। 2024 में BLA ने कराची एयरपोर्ट के पास और ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी कॉम्प्लेक्स के पास आत्मघाती हमलों का दावा किया था। 2025 में इस संगठन ने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफ़र एक्सप्रेस ट्रेन का अपहरण करने की जिम्मेदारी ली, जिसमें 31 नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी, जबकि 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया गया था।

बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी हिंसा का केंद्र रहा है। यहां के उग्रवादी संगठन इस्लामाबाद और विदेशी कंपनियों पर प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के शोषण का आरोप लगाते हैं। इनके हमलों का निशाना अक्सर पाकिस्तानी सुरक्षा बल और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)से जुड़े चीनी कर्मचारी होते हैं।

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय न केवल पाकिस्तान बल्कि दुनिया भर में आतंकवाद से लड़ने की उसकी रणनीति का हिस्सा है और ऐसे संगठनों के खिलाफ कड़ा संदेश है।

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