Home टेक लखनऊ की शान: अंतरिक्ष में जाने को तैयार!

लखनऊ की शान: अंतरिक्ष में जाने को तैयार!

लखनऊ निवासी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अमेरिका के नासा में प्रशिक्षण का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। नासा के संयुक्त मिशन एक्सिओम-4 के लिए प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा हो चुका है।

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Lucknow: अंतरिक्ष की यात्रा पर निकलने को तैयार लखनऊ निवासी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के परिवार के साथ साथ पूरे लखनऊ में भी जश्न का माहौल है। माता-पिता और रिश्तेदार गर्व के इस मौके पर फूले नहीं समा रहे हैं। शुभांशु और मिशन की कामयाबी के लिए परिवार में प्रार्थना का दौर जारी है।

राजधानी लखनऊ निवासी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अमेरिका के नासा में प्रशिक्षण का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को अपने एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि इसरो और नासा के संयुक्त मिशन एक्सिओम-4 के लिए प्रशिक्षण का पहला चरण पूरा हो चुका है।

इसरो की ओर से भारत और अमेरिका के संयुक्त अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजे जाने के लिए लखनऊ में जन्मे शुभांशु प्राइम एस्ट्रोनॉट के तौर पर चुने गए हैं। मिशन में शुभांशु के साथ भारत के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर भी हैं। यह मिशन एक्सिओम स्पेस कंपनी और अंतरिक्ष एजेंसी नासा के बीच सहयोग का हिस्सा है, जिसमें ये दोनों भारतीय अप्रैल 2025 में स्पेस-X के यान पर सवार होकर अंतरिक्ष में रवाना होंगे

माता- पिता का सिर गर्व से ऊँचा!
अंतरिक्ष यात्रा में शामिल जोखिम के सवाल पर पिता शंभु दयाल शुक्ला ने कहा कि हमें ईश्वर पर पूरा भरोसा है। शुभांशु की मां ऊषा शुक्ला धार्मिक गृहिणी हैं। उन्होंने कहा कि हम रोजाना भगवान से मिशन की कामयाबी के लिए प्रार्थना करते हैं। हमारी प्रार्थना जरूर रंग लाएगी और हमें इसपर गर्व है ।

अगस्त में शुरू हुआ था प्रशिक्षण!
अगस्त में अमेरिका के नासा में शुरू हुए प्रशिक्षण में दोनों को अंतरिक्ष यात्रा की जटिलताओं के लिए तैयार किया गया। इसमें मिशन में दिए जाने वाले सुविधाओं के बारे में और लॉन्चिंग की प्रक्रियाओं के अध्ययन के साथ ही क्रू ड्रैगन यान का अभ्यास शामिल है। इसमें शून्य ग्रेविटी में आपात स्थितियों का अभ्यास भी शामिल है।

क्या है मिशन का लक्ष्य?
अप्रैल 2025 में भेजे जा रहे एक्सिओम-4 मिशन के तहत ये अंतरिक्ष यात्री 14 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे। वहां वे माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ ही जीवन सहायक उपकरण चलाना सीखेंगे।

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