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Saturday, January 3, 2026

समानता की पुकार: Sambhal में सपा नेता ने CM YOGI से ‘नमाजियों पर भी हेलिकॉप्टर से हो पुष्पवर्षा’ की मांग

नेता का कहना है कि यदि सरकार एक धार्मिक समूह के लिए इस तरह के भव्य आयोजन कर सकती है, तो अन्य समुदायों को भी समानता मिलनी चाहिए।

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Sambhal  में एक सपा नेता ने आज एक चौंकाने वाला बयान देते हुए CM Yogi Adityanath से मांग की है कि जैसे कांवड़ियों पर Helicopter से पुष्पवर्षा की व्यवस्था की जाती है, वैसे ही नमाजियों पर भी यह सुविधा दी जाए।

नेता का कहना है कि यदि सरकार एक धार्मिक समूह के लिए इस तरह के भव्य आयोजन कर सकती है, तो अन्य समुदायों को भी समानता मिलनी चाहिए।

इस मांग के तहत नेता ने Social Media पर एक video भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा, “अगर कांवड़ियों को हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा का आनंद मिलता है,

तो क्यों न नमाजियों को भी यही भेंट दी जाए?” उनका यह बयान एक प्रतीकात्मक अपील के रूप में सामने आया है, जो सरकार से समावेशी नीतियों की मांग करता है।

नेता का तर्क है कि राज्य की ओर से समान अवसर और सम्मान सभी नागरिकों को मिलना चाहिए, चाहे वे किसी भी धार्मिक समुदाय से हों।

CM YOGI ने हाल ही में कांवड़ियों के लिए Helicopter से पुष्पवर्षा की व्यवस्था की थी, जिसे उनके समर्थकों ने एक प्रशंसनीय पहल कहा।

इस संदर्भ में सपा नेता ने यह सवाल उठाया कि क्या अगर यह व्यवस्था एक समुदाय के लिए संभव है, तो अल्पसंख्यक समुदायों के लिए क्यों नहीं? उनका यह बयान न केवल धार्मिक समानता पर जोर देता है, बल्कि सरकार की नीतियों में संतुलन की मांग भी करता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान से सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में नई बहस छिड़ सकती है।

कुछ विशेषज्ञ इसे सकारात्मक पहल मानते हैं, जो सभी समुदायों के लिए बराबरी की बात करता है, वहीं अन्य इसे विवादास्पद और भेदभावपूर्ण कदम कहकर आलोचना कर सकते हैं।

राजनीतिक पार्टियों के अगले कदम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि ऐसी मांग से आगामी चुनावी माहौल में भी असर पड़ सकता है।

इस बीच, CM योगी आदित्यनाथ के कार्यालय से अभी तक इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कई राजनीतिक विश्लेषक उम्मीद जताते हैं कि निकट भविष्य में सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान देगी।

सोशल मीडिया पर इस मांग को लेकर विभिन्न मत सामने आ रहे हैं; कुछ लोग इसे समावेशी पहल मान रहे हैं, तो कुछ इसे व्यंग्यात्मक और राजनीति का औजार भी समझ रहे हैं।

 

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