22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम हिल स्टेशन पर हुए कायराना आतंकी हमले ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई और कई लोग घायल हुए। इस दर्दनाक घटना के पीछे एक बार फिर वही कुख्यात देश निकला—पाकिस्तान। यह वही पाकिस्तान है जो दशकों से आतंकवाद को पालता-पोसता रहा है और बार-बार भारत के धैर्य की परीक्षा लेता आया है। लेकिन इस बार भारत का मूड कुछ अलग है। जनता का गुस्सा, सरकार की तीव्र प्रतिक्रिया और विश्व समुदाय की प्रतिक्रियाएं साफ दर्शाती हैं कि पाकिस्तान अब और नहीं बच पाएगा।
हमले के बाद भारत में जबरदस्त रोष फैला हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन, कैंडल मार्च और पाकिस्तान विरोधी नारे गूंज रहे हैं। पीएम मोदी ने विदेश यात्रा बीच में छोड़ तुरंत भारत लौटकर साफ शब्दों में कहा कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी जो उनकी कल्पना से भी परे होगी। भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर कई बड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं। पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध सीमित किए जा चुके हैं, सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया है और भारत ने अपने एयरस्पेस के साथ-साथ बंदरगाहों को भी पाकिस्तान के लिए बंद कर दिया है। साफ है कि भारत अब शब्दों से नहीं, कार्रवाई से जवाब देगा।
पाकिस्तान की घबराहट इस बात से भी झलक रही है कि उसके मंत्री लगातार बेतुकी और भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री इशाक डार ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने पानी से छेड़छाड़ की तो इसे युद्ध की घोषणा माना जाएगा। लेकिन असल में यह बयान उनकी घबराहट और असहायता का प्रतीक है। आतंकवाद को पनाह देने वाला देश अब खुद डर के साये में जी रहा है।
भारत की कूटनीतिक और सैन्य तैयारी से कांपा पाकिस्तान
पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस तेजी और आक्रोश के साथ फैसले लिए हैं, उससे पाकिस्तान की नींद उड़ गई है। सबसे पहले भारत ने पाकिस्तान के साथ चल रहे सभी कूटनीतिक संबंधों की समीक्षा की और नई दिल्ली स्थित पाक उच्चायोग के कई अधिकारियों को ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित कर देश छोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने उच्चायोग से भी रक्षा, नौसेना और वायुसेना सलाहकारों को वापस बुला लिया है।
भारत ने 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर दिया है जो भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ दुष्प्रचार फैला रहे थे। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट भी भारत सरकार द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है। यह वही मंत्री हैं जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया था कि पाकिस्तान की भूमि से आतंकवादियों को समर्थन मिलता है।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के लिए एयरस्पेस और बंदरगाह बंद कर दिए हैं, जिससे पाकिस्तान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। पाकिस्तान की निर्भरता इन रूट्स पर काफी अधिक है, और भारत का यह कदम उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी कमजोर साबित करता है।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत सरकार की सख्ती का ही असर है कि पाकिस्तान अब चौतरफा दबाव में है। चीन, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों से मदद की गुहार लगाई जा रही है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी सिफारिश से पीछे नहीं हटेगा। भारतीय सेना को कार्रवाई का तरीका और समय तय करने की पूरी छूट दे दी गई है। इसका मतलब है कि पाकिस्तान पर जवाबी हमला अब सिर्फ समय का सवाल है।
हमले के बाद भारत सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये और घायलों के लिए 2 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। इसके अलावा मामूली रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह कदम सरकार की संवेदनशीलता को दिखाता है, जबकि पाकिस्तान की भूमिका इस पूरी घटना में एक शातिर गुनहगार की तरह सामने आई है।
इस हमले में मारे गए लोगों में भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे, जिनकी हाल ही में शादी हुई थी। उनके बलिदान ने देश को और भी अधिक आहत किया है। इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान में फंसे भारतीय नागरिकों को वाघा बॉर्डर के जरिए वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पिछले कुछ दिनों में 1,000 से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
हमले की जांच में पांच आतंकियों की पहचान हो चुकी है, जिनमें तीन पाकिस्तानी और दो कश्मीरी शामिल हैं। सभी को पाकिस्तान से प्रशिक्षण और हथियार मिले थे। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि पाकिस्तान इस हमले का मास्टरमाइंड है और उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
पीएम मोदी ने बिहार की रैली में साफ शब्दों में कहा कि “मैं धरती के अंत तक जाऊंगा और उन दरिंदों को खोज निकालूंगा। उन्हें ऐसी सजा मिलेगी जो उन्होंने सपने में भी नहीं सोची होगी।”
अब यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत ने पाकिस्तान को हर मोर्चे पर घेरने का फैसला कर लिया है—चाहे वो कूटनीतिक हो, सैन्य हो या आर्थिक। और इस बार, जवाब ऐसा होगा जिसे पाकिस्तान पीढ़ियों तक याद रखेगा।
