आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में झेलना पड़ रहा है, क्योंकि राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। मित्तल हाल ही में राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी के उपनेता बनाए गए थे, ऐसे में उनका यह कदम पार्टी के लिए गंभीर संकट का संकेत माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने उच्च सदन में बदलते राजनीतिक समीकरणों को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशोक मित्तल के साथ राघव चड्ढा और संदीप पाठक भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह AAP के लिए संसद में एक बड़ा झटका साबित होगा और उसकी स्थिति और कमजोर हो सकती है।
दरअसल, बीते कुछ हफ्तों से AAP के राज्यसभा यूनिट में अंदरूनी हलचल देखी जा रही थी। इसी महीने पार्टी ने राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी थी। उस समय इसे एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव बताया गया था, जबकि अब यह फैसला एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा नजर आ रहा है।
अशोक मित्तल, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर भी हैं, 2022 में राज्यसभा पहुंचे थे और उन्हें AAP के प्रमुख चेहरों में गिना जाता था। उनका पार्टी छोड़ना इस बात पर सवाल खड़े करता है कि क्या AAP अपने सांसदों के बीच भरोसा बनाए रखने में सफल हो पा रही है।
AAP के लिए यह समय पहले से ही राजनीतिक दबाव का है, और ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक साथ बाहर जाना उसकी रणनीतिक स्थिति को और कमजोर कर सकता है। चड्ढा, पाठक और मित्तल का संभावित रूप से भाजपा में शामिल होना सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गहराते असंतोष का संकेत भी माना जा रहा है।
