यदि आप आने वाले दिनों में लुफ्थांसा, ब्रिटिश एयरवेज, SWISS, या ITA एयरवेज जैसी किसी यूरोपीय एयरलाइन से भारत की यात्रा करने या यहां से यूरोप जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। कई प्रमुख इंटरनेशनल एयरलाइंस ने पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने से इनकार कर दिया है, जिससे उनके फ्लाइट रूट्स में बड़ा बदलाव आया है। नतीजतन, अब इन उड़ानों का सफर लंबा और समय-खपत वाला हो सकता है।
क्यों बदले जा रहे हैं रूट?
पाकिस्तान पहले ही भारतीय एयरलाइंस के लिए कुछ एयरवे बंद कर चुका है। अब मौजूदा भारत-पाक तनाव को देखते हुए कई यूरोपीय एयरलाइंस ने उत्तरी पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचना शुरू कर दिया है। Flightradar24 के अनुसार, यह बदलाव 30 अप्रैल 2025 से देखने को मिल रहा है और 2 मई से लुफ्थांसा, ITA एयरवेज और LOT पोलिश एयरलाइंस ने पाकिस्तान के ऊपर से पूरी तरह उड़ानें रोक दी हैं।
कौन-कौन सी उड़ानें प्रभावित हुईं?
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लुफ्थांसा की म्यूनिख–दिल्ली, फ्रैंकफर्ट–मुंबई, फ्रैंकफर्ट–हैदराबाद और बैंकॉक–म्यूनिख फ्लाइट अब पाकिस्तान को बायपास कर रही हैं।
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LOT पोलिश एयरलाइंस की वारसा–दिल्ली फ्लाइट और
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ITA एयरवेज की रोम–दिल्ली फ्लाइट भी नए रूट से उड़ रही हैं।
यह बदलाव किसी रूटीन परिवर्तन का हिस्सा नहीं है, बल्कि सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक कदम है। एविएशन अधिकारियों का कहना है कि अगर भारत-पाक तनाव और बढ़ता है, तो अन्य एयरलाइनों को भी अपने रूट में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
KLM ने अब तक नहीं बदला रूट
जहां अधिकांश यूरोपीय एयरलाइंस पाकिस्तान से दूरी बना रही हैं, वहीं KLM Royal Dutch Airlines अब भी पाकिस्तान के एयरस्पेस से होकर उड़ान भर रही है। एयरलाइन का कहना है कि वे सेफ्टी एनालिसिस के आधार पर ही रूट प्लानिंग करते हैं और फिलहाल उन्हें कोई गंभीर खतरा नजर नहीं आ रहा है।
KLM ने अपने बयान में कहा:
“हम अपने पैसेंजर्स और क्रू की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। रूट प्लानिंग में सुरक्षा का विश्लेषण हमारी डेली प्रैक्टिस का हिस्सा है।”
यात्रियों पर असर
इस बदलाव से यात्रियों को 1 घंटे तक की अतिरिक्त उड़ान अवधि, संभावित डिले, और अधिक ईंधन लागत के चलते टिकट के दाम में बदलाव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर भी असर पड़ सकता है।
यदि आप निकट भविष्य में यूरोप से भारत या भारत से यूरोप की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो फ्लाइट ड्यूरेशन और ले-ओवर टाइम्स की दोबारा जांच करना जरूरी है।