कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 1 अप्रैल से हुई बढ़ोतरी पर सरकार ने साफ कहा है कि होटल, ढाबों और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले ये सिलेंडर सरकारी नियंत्रण में नहीं होते, बल्कि बाजार के हिसाब से तय किए जाते हैं। सरकारी और तेल विपणन कंपनियों के मुताबिक, घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा क्योंकि कुल LPG खपत में कमर्शियल सिलेंडर की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम है।
सरकारी बयान के मुताबिक, दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज उछाल है। पश्चिम एशिया में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास सप्लाई पर पड़े दबाव ने ग्लोबल LPG चेन को प्रभावित किया, जिससे कीमतों में इजाफा हुआ। सरकार ने यह भी कहा कि अगर घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर बोझ नहीं बढ़ाया गया है, तो इसका कारण उपभोक्ता राहत को प्राथमिकता देना है।
1 अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम दिल्ली में 195.50 रुपये बढ़कर 2,078.50 रुपये हो गए हैं। कोलकाता में यह 2,208 रुपये, मुंबई में 2,031 रुपये और चेन्नई में 2,246.50 रुपये तक पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल गैस के दाम में बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि घरेलू सिलेंडर पर फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, लेकिन तेल विपणन कंपनियों पर बोझ लगातार बना हुआ है। मौजूदा स्थिति में हर घरेलू सिलेंडर पर कंपनियों को करीब 380 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, और अनुमान है कि मई के अंत तक यह कुल घाटा 40,484 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
बयान में यह भी कहा गया कि भारत की कीमतें पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल की तुलना में अलग हैं, और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर इन देशों में भी दिखाई देता है। सरकार ने संकेत दिया कि सप्लाई चेन सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय दबाव कम होने पर कीमतों में नरमी आ सकती है।
