भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मई 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ गई। हालांकि, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला निवेश मजबूत बना रहा, जो भारतीय रिटेल निवेशकों के लंबे समय के भरोसे को दर्शाता है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में नेट निवेश 22,907 करोड़ रुपये रहा, जो अप्रैल के 38,440 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 40% कम है। इसके बावजूद यह आंकड़ा मई 2025 के 19,013 करोड़ रुपये से 20% अधिक रहा। खास बात यह है कि यह लगातार 63वां महीना है जब इक्विटी फंड्स में नेट निवेश पॉजिटिव रहा।
AMFI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट चलसानी के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को सतर्क बना दिया। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से बाजार में अस्थिरता बढ़ी और निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया।
मई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल प्रबंधित संपत्ति (AUM) मामूली घटकर 81.58 लाख करोड़ रुपये रह गई, जो अप्रैल में 81.92 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं SIP कंट्रीब्यूशन 30,953.83 करोड़ रुपये के मजबूत स्तर पर बना रहा।
इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे लोकप्रिय रहे, जहां 5,176 करोड़ रुपये का निवेश आया। स्मॉल-कैप फंड्स में 4,945.57 करोड़ रुपये और मिड-कैप फंड्स में 4,385.06 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट सीईओ फिरोज अजीज के मुताबिक, कुल इक्विटी निवेश का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इन तीन श्रेणियों में गया।
दूसरी ओर, डेट म्यूचुअल फंड्स में मई के दौरान 96,948 करोड़ रुपये की नेट आउटफ्लो दर्ज की गई। मई में गोल्ड ETF से 725.04 करोड़ रुपये की नेट आउटफ्लो हुई, जबकि इससे पहले लगातार 12 महीनों तक इनमें निवेश आ रहा था। फिरोज अजीज का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की और इक्विटी में पैसा लगाया।
