राजस्थान LDC भर्ती परीक्षा में नकल कांड: 5 लोगों पर FIR, CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) की ओर से आयोजित लिपिक ग्रेड द्वितीय (LDC) भर्ती परीक्षा में सामने आए कथित नकल प्रकरण ने अब कानूनी रूप ले लिया है। 5 जुलाई को जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल परीक्षा केंद्र पर आयोजित परीक्षा के दौरान कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर कोतवाली थाना पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले में परीक्षा केंद्र के केंद्रीय अधीक्षक, दो वीक्षक, एक रिलीवर और एक अभ्यर्थी को नामजद किया गया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी रिलीवर पदम सिंह और अभ्यर्थी मनु कंवर को डिटेन कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

कोतवाली थाना पुलिस ने एफआईआर संख्या 0136/2026 राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2022 की धारा 3/10 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। थानाधिकारी सुरजाराम ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है।

किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

एफआईआर में परीक्षा केंद्र के केंद्रीय अधीक्षक उम्मेद सिंह, रिलीवर पदम सिंह, वीक्षक भीम सिंह, जालम सिंह तथा अभ्यर्थी मनु कंवर पत्नी लक्ष्मण सिंह को नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी माने जा रहे रिलीवर पदम सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं जिस अभ्यर्थी की कथित रूप से मदद किए जाने का आरोप है, उसे भी सखी केंद्र में रखा गया था। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई

मामले के सामने आने के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के निर्देश पर जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता एसडीएम भरत गुर्जर ने की, जबकि सीओ सिटी रूप सिंह इंदा और जिला शिक्षा अधिकारी महेश कुमार बिस्सा को सदस्य बनाया गया।

समिति ने परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज, परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। विस्तृत जांच के बाद मंगलवार देर शाम रिपोर्ट जिला कलेक्टर को सौंपी गई। रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

CCTV फुटेज में क्या सामने आया?

जांच से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज इस पूरे मामले का सबसे अहम साक्ष्य माना जा रहा है। फुटेज में कथित तौर पर रूम नंबर-10 में तैनात रिलीवर पदम सिंह अभ्यर्थी मनु कंवर से प्रश्नपत्र लेते हुए दिखाई देते हैं।

दावा किया गया है कि उन्होंने प्रश्नपत्र करीब 6 से 7 मिनट तक अपने पास रखा और बाद में उसे वापस अभ्यर्थी को सौंप दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होता है तो इसे परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और नकल कराने का गंभीर मामला माना जाएगा। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

परीक्षा के दौरान कैसे शुरू हुआ विवाद?

5 जुलाई को जैसलमेर जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर दो पारियों में एलडीसी भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल परीक्षा केंद्र पर 10 कमरों में कुल 240 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था थी और प्रत्येक कमरे में 24 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे।

बताया गया कि शाम करीब 4 बजे रूम नंबर-10 में नकल कराने की चर्चा शुरू हुई। आरोप है कि उस समय केंद्रीय अधीक्षक ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। करीब 5 बजे फ्लाइंग स्क्वॉड के परीक्षा केंद्र पहुंचने पर अभ्यर्थियों ने अधिकारियों के सामने मामला उठाया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और परीक्षा समाप्त होने के बाद एडीएम परसराम ने शिकायतकर्ताओं और आरोपित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।

राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा मामला

परीक्षा के अगले दिन 6 जुलाई को जैसलमेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, पूर्व मंत्री हरीश चौधरी, पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस और एनएसयूआई के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

अब जांच में क्या होगा आगे?

पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेंवतदान चारण को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच अधिकारी, सीओ सिटी रूप सिंह और कोतवाली थाना पुलिस की टीम स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी साक्ष्य जुटाने के लिए मौके पर बुलाया गया है। पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक और अन्य भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि पर्याप्त साक्ष्य मिले तो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द की जा सकती है।

यह मामला राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, बल्कि मेहनत से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के भरोसे को भी कमजोर करती है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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