राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वागड़-मेवाड़ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे सचिन पायलट ने बांसवाड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत के हालिया बयान पर ऐसी प्रतिक्रिया दी, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया।
सोमवार (13 जुलाई) को बांसवाड़ा सर्किट हाउस में पत्रकारों ने जब पायलट से अशोक गहलोत के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने पायलट को “अपने बेटे की तरह” बताया था, तो पायलट ने मुस्कुराते हुए कहा, “आपने उनका स्टेटमेंट रिपीट किया है। उसको गांठ बांधकर रखो। उसको लपेटकर रखो। वही अंततः सत्य है, वही रहेगा।” पायलट का यह संक्षिप्त लेकिन अहम जवाब अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
गहलोत ने क्या कहा था?
पिछले महीने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि उनके मन में पायलट के लिए हमेशा स्नेह रहा है। उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट उनके बेटे वैभव की तरह हैं और जब वे सांसद थे, तब सचिन और वैभव दोनों छोटे बच्चे थे।
गहलोत ने कहा था, “सचिन पायलट को भी यह समझना चाहिए कि हम उनके दुश्मन नहीं हैं। बचपन से ही हमारे मन में उनके लिए स्नेह रहा है। चाहे सचिन हों या मेरा बेटा वैभव, जब हम सांसद थे तब ये दोनों 2-3 साल के बच्चे थे। मैं आज भी उन्हें उसी नजर से देखता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा था कि अब राजनीति में सचिन पायलट को कौन सलाह देता है, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उनके मन में किसी तरह की कटुता नहीं है।
पायलट के जवाब के निकाले जा रहे कई मायने
सचिन पायलट ने गहलोत के बयान पर कोई लंबी टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनका यह कहना कि “वही अंततः सत्य है, वही रहेगा” कई राजनीतिक संकेत छोड़ गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पायलट ने बिना किसी विवाद को हवा दिए गहलोत के बयान का सकारात्मक जवाब दिया है। वहीं कुछ लोग इसे दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में आई नरमी के संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।
हालांकि, पायलट ने इस दौरान कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों या भविष्य की राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं की।
लंबे समय तक चर्चा में रहा था दोनों नेताओं का विवाद
राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मतभेद कई वर्षों तक खुलकर सामने आते रहे। वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान दोनों नेताओं के बीच खींचतान राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बनी थी। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक हलकों में सुर्खियां बटोरते रहे हैं।
हाल के महीनों में हालांकि दोनों नेताओं की ओर से सार्वजनिक मंचों पर अपेक्षाकृत संयमित बयान देखने को मिले हैं। गहलोत द्वारा पायलट को लेकर दिए गए स्नेहपूर्ण बयान और अब पायलट की प्रतिक्रिया को कांग्रेस के भीतर बदलते राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस की राजनीति पर रहेगी नजर
राजस्थान में आने वाले समय में संगठनात्मक गतिविधियां और चुनावी तैयारियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर दिखाई दे रही सकारात्मक भाषा को पार्टी कार्यकर्ता भी अहम मान रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से भविष्य की रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
फिलहाल, बांसवाड़ा में सचिन पायलट का “गहलोत के बयान को गांठ बांधकर रखो” वाला बयान राजनीतिक चर्चाओं में छाया हुआ है और इसके अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।
