दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके के पास पांच मंजिला इमारत के ढहने की दर्दनाक घटना ने राजधानी में छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार दोपहर हुए इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), नगर निगम और सिविल डिफेंस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
बताया जा रहा है कि यह इमारत लड़कों के पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हादसे के वक्त इमारत के भीतर बड़ी संख्या में छात्र मौजूद हो सकते थे। हालांकि, मलबे में अभी कितने लोग फंसे हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बचाव दल मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर संभावित लोगों की तलाश कर रहे हैं।
कांग्रेस और NSUI ने उठाए सवाल
हादसे को लेकर कांग्रेस और उसके छात्र संगठन NSUI ने दिल्ली सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि इमारत गिरने के बाद पुलिस और प्रशासनिक राहत टीमें मौके पर पहुंचने में काफी समय लगा।
जाखड़ ने सवाल उठाया कि जब छात्रों की जान बचाने की जरूरत थी, तब सरकार और प्रशासन कहां था। उनके मुताबिक, घटना की सूचना मिलने के बाद NSUI कार्यकर्ता तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कार्यकर्ता वहां पहुंचे, तब तक फायर ब्रिगेड, पुलिस, मेडिकल सहायता और मलबा हटाने के लिए जेसीबी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं मौके पर मौजूद नहीं थीं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि NSUI कार्यकर्ताओं ने शुरुआती दौर में अपने हाथों से मलबा हटाकर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की। उनके मुताबिक, इस दौरान तीन बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
‘मलबे में दबा मिला छात्र का हाथ’
विनोद जाखड़ ने हादसे के दौरान सामने आए एक बेहद भावुक दृश्य का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि बचाव अभियान के दौरान मलबे में दबे एक बच्चे के हाथ में किताब मिली।
जाखड़ ने कहा कि जिस हाथ में किताब होनी चाहिए थी, वह मलबे के नीचे दबा मिला। कांग्रेस ने इस घटना को महज हादसा नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया है।
पार्टी ने सवाल उठाया है कि छात्र इलाकों में संचालित PG और निजी आवासीय इमारतों की सुरक्षा जांच कितनी नियमित होती है। कांग्रेस का कहना है कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतें निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।
जांच और जवाबदेही की मांग
कांग्रेस ने पूरे मामले की विस्तृत और समयबद्ध जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जांच में इमारत की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण की अनुमति, संभावित मरम्मत या निर्माण कार्य, बेसमेंट से जुड़े काम और संबंधित नगर निकाय अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
साथ ही, राहत एवं बचाव दलों की कथित देरी की भी जांच की मांग की गई है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी अधिकारी या एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
बचाव अभियान जारी
हादसे के बाद आसपास की एक इमारत को भी एहतियात के तौर पर खाली कराया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं तथा नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फिलहाल इमारत गिरने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। जांच के दौरान भवन की स्थिति, संभावित संरचनात्मक कमजोरी और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी। वहीं कांग्रेस ने मांग की है कि हादसे की जिम्मेदारी तय करने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में छात्र आवासों में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
