तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय को सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सीआईडी ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के तुरंत बाद की गई। सीआईडी ने सुमित रॉय को अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास से हिरासत में लिया।
सुमित रॉय की गिरफ्तारी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वह अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते हैं और लंबे समय से उनके निजी सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। सीआईडी की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सालबोनी जमीन मामले में रॉय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
सुमित रॉय ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान रॉय को अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी और उन्हें जांच एजेंसी के समक्ष पेश होकर जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद गिरफ्तारी पर लगी सुरक्षा समाप्त हो गई। इसके तुरंत बाद सीआईडी की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि उन्हें शुक्रवार सुबह मेदिनीपुर की अदालत में पेश किया जा सकता है। जांच एजेंसी पूछताछ के लिए उनकी पुलिस हिरासत की मांग कर सकती है।
क्या है सालबोनी जमीन मामला?
सालबोनी जमीन मामला पश्चिम बंगाल में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अवैध बिक्री के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसियां कथित रूप से सरकारी भूमि को निजी संपत्ति के तौर पर दिखाकर उसकी खरीद-बिक्री किए जाने के मामले की जांच कर रही हैं। इस केस में जमीन के दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और कथित नकद जमा से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान रॉय के बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होने की जानकारी सामने आई है। सरकार ने यह भी दावा किया कि पूछताछ के दौरान रॉय कई सवालों के सीधे जवाब देने से बचते रहे।
राज्य सरकार का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को समझने के लिए रॉय से कस्टोडियल इंटरोगेशन आवश्यक है। वहीं, रॉय की ओर से अदालत में कहा गया था कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है और जांच एजेंसी के बुलाने पर पेश भी हुए हैं।
सियासी हलकों में बढ़ी हलचल
सुमित रॉय की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। चूंकि रॉय अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव हैं, इसलिए यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, गिरफ्तारी को दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी अब रॉय से पूछताछ के आधार पर मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों, जमीन के सौदों और अन्य संदिग्ध लेन-देन की जांच आगे बढ़ाएगी। मामले में अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
