इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पूर्व प्रवक्ता इलियेजर फेल्डस्टीन को सोमवार को गाजा बंधकों की रिहाई के लिए चल रही वार्ता को खतरे में डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उन पर गुप्त और संवेदनशील खुफिया दस्तावेजों को लीक करने का आरोप है, जिसके परिणामस्वरूप इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता था। इस दस्तावेज लीक के कारण गाजा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई के उद्देश्य को भी नुकसान हो सकता था, जैसा कि इजराइल की अदालत ने कहा है।
इजराइल की अदालत ने यह भी कहा कि लीक हुए दस्तावेजों की सार्वजनिकता से “राज्य की सुरक्षा को गंभीर नुकसान हो सकता था।” अदालत ने यह चेतावनी भी दी कि इस लीक के कारण सुरक्षा एजेंसियों की बंधकों की रिहाई के लिए की जा रही कोशिशों में विघ्न पड़ सकता था, जो इजराइल के युद्ध लक्ष्य का हिस्सा था। यह घटना इजराइल की सुरक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है, खासकर उस समय जब इजराइल गाजा के आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है और बंधकों को सुरक्षित रूप से छुड़ाने की कोशिश कर रहा है।
दस्तावेज़ लीक के कारण विवाद बढ़ा
इलियेजर फेल्डस्टीन और उनके तीन अन्य साथियों की गिरफ्तारी के बाद से इस मामले में राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इजराइल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी और सेना ने इस दस्तावेज लीक की जांच सितंबर में शुरू की थी, जब दो प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों, ब्रिटेन के The Jewish Chronicle और जर्मनी के Bild टैब्लॉयड ने गुप्त दस्तावेजों के आधार पर खबरें प्रकाशित की थीं। इन खबरों में दावा किया गया था कि एक दस्तावेज़ में यह बताया गया था कि तब के हमास नेता याह्या सिनवार (जिन्हें बाद में इजराइल ने मार गिराया) और गाजा में बंधक बनाए गए लोग फिलिस्तीनी-इजराइली सीमा से लगे फिलाडेल्फी कॉरिडोर के माध्यम से मिस्र में तस्करी किए जाएंगे। एक और खबर में हामस के एक आंतरिक मेमो का जिक्र किया गया था, जिसमें सिनवार के बंधकों की रिहाई की वार्ता को विफल करने की रणनीति का विवरण था।
हालांकि, इजराइल मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लीक हुआ पहला दस्तावेज़ नकली था, और जो आंतरिक मेमो प्रकाशित हुआ था, वह दरअसल हामस के कम रैंक वाले मिलिटेंट्स द्वारा लिखा गया था, न कि सिनवार या अन्य वरिष्ठ हामस नेताओं द्वारा। इसके बाद से यह मामला और भी पेचीदा हो गया है, क्योंकि इस लीक ने दोनों देशों के बीच असमंजस और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जन्म दिया है।
नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं के बीच विवाद
इस बीच, विपक्षी नेताओं ने यह सवाल उठाया है कि क्या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस दस्तावेज लीक में शामिल हैं। विपक्षी नेता यैयर लापिड ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि “प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई इस गंभीर सुरक्षा घटना को लेकर हर इजराइल को चिंता होनी चाहिए।” लापिड ने आरोप लगाया कि यह घटना प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी हुई थी और इस मामले की जांच करनी चाहिए कि क्या यह प्रधानमंत्री के आदेश पर किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए पूरी तरह से जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
एक और प्रमुख विपक्षी नेता, बेनी गैंट्ज़ ने इसे एक सामान्य दस्तावेज़ लीक नहीं बल्कि “राजनीतिक लाभ के लिए राज्य रहस्यों का शोषण” बताया। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है, और इसमें राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सुरक्षा सूचनाओं का उपयोग किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे इस लीक के पीछे हो सकते हैं और इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेतन्याहू ने आरोपों का खंडन किया
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी नेताओं के आरोपों का जोरदार खंडन किया है। उन्होंने कहा कि Bild द्वारा प्रकाशित दस्तावेज़ कभी उनके कार्यालय में नहीं आया था। नेतन्याहू ने कहा कि उनके कार्यालय में इस प्रकार के गुप्त दस्तावेज़ की कोई जानकारी नहीं थी और न ही कोई दस्तावेज़ इस तरह के लीक हुए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फेल्डस्टीन ने कभी सुरक्षा बैठक में हिस्सा नहीं लिया था और न ही उसने किसी भी गुप्त दस्तावेज़ पर विचार-विमर्श किया था।
हालांकि, नेतन्याहू ने फेल्डस्टीन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट था कि इस मामले में फेल्डस्टीन का किसी प्रकार की संलिप्तता नहीं थी। नेतन्याहू ने कहा कि यदि किसी ने इस तरह के दस्तावेज़ों का लीक किया है तो वह बिल्कुल गलत है, और वह इस मामले की जांच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
सम्बंधित मामले और भविष्य के प्रभाव
यह घटना इजराइल के लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकती है, खासकर उस समय जब देश युद्ध की स्थिति में है और बंधकों की रिहाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इस दस्तावेज लीक के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ सकते हैं, और यह घटना इजराइल के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक और सुरक्षा बहस का कारण बन सकती है।
इसके अलावा, यदि यह साबित होता है कि इस लीक का उद्देश्य इजराइल के राजनीतिक लाभ के लिए था, तो यह देश की सुरक्षा और उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों और नेतन्याहू की सरकार के इस मामले में जवाबदेही के मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में इजराइल की राजनीति में हलचल हो सकती है।
कनाडा में बंधकों की रिहाई और इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए यह मामला गंभीर है। हालांकि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आरोपों का खंडन किया है, लेकिन इस मामले ने इजराइल की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को एक नई चुनौती दे दी है। विपक्षी दलों के आरोपों और नेतन्याहू सरकार के बचाव के बीच यह स्थिति अब अदालत में जांच का विषय बन गई है। अब यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर इसका क्या असर पड़ता है।