क्या है महाकुंभ के भगदड़ के पीछे की असली कहानी? क्या सबूत मिटाने की कोशिश कर रही है सरकार?

महाकुंभ में मंगलवार की देर रात मौनी अमावस्या की रात अचानक भीड़ बेकाबू हुई और संगम किनारे भगदड़ मच गई. इस भगदड़ की असली वजह क्या थी, इसको लेकर बिहार के युवकों ने सारी जानकारी दी, जो वहां मौनी अमावस्या पर मौजूद थे.

0
110

प्रयागराज में लगे महाकुंभ में भगदड़ को लेकर काफी चर्चा हो रही है. मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में भगदड़ हुई और लोग एक-दूसरे पर चढ़ने लगे.

भगदड़ में 30 से ज्‍यादा श्रद्धालुओं की हो गई थी मौत

महाकुंभ मेले में एक नहीं बल्कि तीन स्थानों पर भगदड़ हुई थी। संगम तट के अलावा सेक्टर 10 में ओल्ड जीटी रोड पर और सेक्टर 21 में उल्टा किला झूंसी के पास भी भगदड़ हुई थी। भगदड़ में 30 से ज्‍यादा श्रद्धालुओं की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इस दर्दनाक हादसे के कुछ घंटे बाद सेक्टर 21 में उल्टा किला झूंसी के पास भी भगदड़ मची थी। भगदड़ में कई श्रद्धालु दब गए और कई अचेत हो गए थे। जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक दुकान में घुस गए थे।

ओल्‍ड जीटी के पास भी भगदड़ में सात की हुई थी मौत

गुरुवार को भी दुकान के भीतर का दृश्य भगदड़ का हाल बता रहा था। सेक्टर 21 के बाद सेक्टर 18 में ओल्ड जीटी के पास एक महामंडलेश्वर की कार के लिए रास्ता बनाने के दौरान भगदड़ हुई थी, जिसमें एक बालिका समेत सात महिलाओं की मौत हुई थी।
सवाल ये है की आखिर इतने प्रबंधन के बावजूद भी ऐसी घटना क्यूँ घटी? किसकी लापरवाही थी, कौन देगा इसका जवाब और कौन है इसका ज़िम्मेदार?

महाकुंभ भगदड़ को लेकर अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी से मांगा इस्तीफा, बोले-जानकारी छुपाकर किया बड़ा धोखा

भगदड़ को लेकर संतों में अब दो फाड़ होती दिखाई दे रही है. एक तरफ जहां कल कैलाशानंद गिरी और अवधेशानंद गिरि ने इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए सरकार के साथ खड़े होने की बात कही है. वहीं, अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा है. इसके पहले सपा नेता शिवपाल यादव और सांसद चंद्रशेखर आजाद भी सीएम योगी की इस्तीफे की मांग कर चुके हैं.

सीएम योगी की अपील से नाराजगीः दरअसल, बुधवार को महाकुंभ में हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इस घटना के बाद प्रशासनिक तौर पर मृतकों और घायलों की संख्या को देर शाम के बाद डिक्लेयर किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पहले इस पूरी भगदड़ की घटना को पहले अफवाह बात बताते हुए संतों और प्रदेश के लोगों से इस पर ध्यान न देने की अपील की थी. मुख्यमंत्री ने संतों- श्रद्धालुओं प्रदेश एवं देशवासियों ने अपील की थी कि अफवाह पर ध्यान न दें, संयम से काम लें. प्रशासन आप सभी की सेवा के लिए तत्परता से कार्य कर रहा है.

धर्म संसद में प्रस्ताव किया पारितः सीएम योगी के संदेश को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार परम धर्म संसद के दौरान महाकुंभ में सरकार और प्रशासन की लापरवाही बताते हुए और भगदड़ के बाद मृतकों की संख्या छुपाए जाने से नाराज होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा का प्रस्ताव पास किया है. जिस पर धर्म संसद में मौजूद सभी लोगों ने एकमत से अपनी सहमति दी.

संत समाज के साथ बड़ा धोखा कियाः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज में परम धर्म संसद में यह प्रस्ताव पास किया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल इस्तीफा दे दें. उन्होंने कहा कि यह लोग काबिल नहीं है. जनता से इन्होंने जानकारी को छुपाया है. संत समाज के साथ बड़ा धोखा किया है, क्योंकि हम जब इतनी बड़ी भगदड़ की सूचना मिलने के बाद स्नान नहीं करने जा रहे थे, तो इन्होंने अफवाह की बात बात कर हमें गलत जानकारी दी और हम सभी ने मृत आत्माओं की शांति के लिए बिना मौन रखें या बिना उन्हें श्रद्धांजलि दिए शाही स्नान भी कर लिया. यह बहुत दुखद है कि हमसे जानकारी को छुपाया गया. बिना जानकारी सही तरीके से हम तक पहुंचाएं मृतकों और घायलों के आंकड़ों को भी बाद में बताया गया.

तत्काल योगी को सीएम पद से हटाया जाएः शंकराचार्य का कहना है कि पूरे दुनिया में घायलों के आंकड़े चल रहे थे, लेकिन प्रशासन और सीएम ने शाम को जारी किया. हमें मृतक आत्माओं की शांति के लिए उपवास या मौन रखने का मौका भी नहीं मिला. इसलिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा को चाहिए कि तत्काल योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया जाए. अभी भी यहां करोड़ों लोग आने वाले हैं, वह भीड़ नहीं संभाल पा रहे हैं. सिर्फ लीपापोती कर रहे हैं.

अभी भी मृतकों की संख्या स्पष्ट नहींः शंकराचार्य ने कहा कि मौनी अमावस्या के एक दिन पहले कुंभ क्षेत्र में भगदड़ मच गई. 30 जनवरी तक यह साफ हो चुका है कि कई जगहों पर भगदड़ मची. मृतकों की संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं हो रही है. सरकार ने न केवल इस घटना को छिपाने की कोशिश की बल्कि इसे अफवाह बात कर श्रद्धालुओं और संत समाज का अपमान भी किया है. परम धर्म संसद में घटना को दुखद बताते हुए मृत्यु की आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मान रखा गया और सांसद ने स्पष्ट रूप से यह प्रस्ताव पारित किया कि भगदड़ की घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो और जो लोग दोषी हो, उन्हें दंडित किया जाए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here