America में हादसे का शिकार हुई बेटी को देखने के लिए पिता तरसे, Mumbai Visa Office ने सुनवाई से किया इनकार

America में हादसे का शिकार हुई बेटी को देखने के लिए पिता तरसे, Mumbai Visa Office ने सुनवाई से किया इनकार

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America में हादसे का शिकार हुई बेटी को देखने के लिए पिता तरसे, Mumbai Visa Office ने सुनवाई से किया इनकार
America में हादसे का शिकार हुई बेटी को देखने के लिए पिता तरसे, Mumbai Visa Office ने सुनवाई से किया इनकार

अमेरिका में गंभीर सड़क हादसे का शिकार हुई छात्रा नीलम शिंदे की हालत नाजुक बनी हुई है, लेकिन उनके पिता आनंद शिंदे को अब तक अमेरिका जाने का वीज़ा नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि Mumbai Visa Office ने उनकी गुहार को नजरअंदाज कर दिया और वहां से बाहर निकल जाने को कहा।

महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले आनंद शिंदे ने कहा, “जब हम मुंबई वीज़ा ऑफिस गए, तो कोई हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था। हमने बार-बार तुरंत वीज़ा देने की अपील की, लेकिन उन्होंने हमें बाहर जाने को कहा। यहां तक कि हमें धमकी दी गई कि अगर हमने जगह नहीं छोड़ी तो पुलिस हमें हटा देगी।”

नीलम शिंदे 14 फरवरी को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैक्रामेंटो में एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। उनकी हालत गंभीर है और वह कोमा में हैं। नीलम के भाई गौरव कदम ने बताया कि हादसा उसी रास्ते पर हुआ, जहां वह रोज़ाना शाम को टहलने जाती थीं। “एक तेज़ रफ्तार गाड़ी ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी और ड्राइवर बिना रुके भाग गया।”

नीलम को सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण उनकी तुरंत सर्जरी करनी पड़ी। अस्पताल ने परिवार को ईमेल कर जल्द से जल्द अमेरिका आने की अपील की, लेकिन उनके पिता को अब तक वीज़ा नहीं मिल सका है।

परिवार ने कई नेताओं और मंत्रियों से मदद मांगी, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिली। “हम लगातार अस्पताल से संपर्क में हैं, डॉक्टर कह रहे हैं कि उनकी हालत थोड़ी सुधर रही है, लेकिन वह अभी भी कोमा में हैं।” गौरव कदम ने बताया कि वीज़ा अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए कोई स्लॉट उपलब्ध नहीं है, जिससे परिवार बेहद परेशान है।

इस बीच, केंद्र सरकार ने अमेरिका से संपर्क कर शिंदे परिवार को जल्द वीज़ा दिलाने का अनुरोध किया है। वहीं, सांसद सुप्रिया सुले ने भी विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

नीलम के परिवार की उम्मीद अब सरकार और अमेरिकी प्रशासन पर टिकी हुई है। क्या उन्हें सही समय पर वीज़ा मिलेगा या पिता को अपनी बेटी से मिलने के लिए और संघर्ष करना पड़ेगा? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।

नोट: हम बिजनेस हेडलाइन (BH) में अपनी नैतिकता को बहुत गंभीरता से लेते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त की जा सकती है।

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