उत्तर प्रदेश की सियासत में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कद्दावर नेता और Former Minister Daddu Prasad ने पार्टी को अलविदा कहकर समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थाम लिया। Daddu Prasad की SP में एंट्री ने BSP सुप्रीमो Mayawati को सीधा सियासी झटका दिया है।
लखनऊ स्थित सपा दफ्तर में दोपहर एक बजे आयोजित प्रैस कॉन्फ्रेंस में Akhilesh Yadav ने खुद Daddu Prasad का स्वागत किया। Daddu Prasad अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब Mayawati खुद पार्टी को संवारने में जुटी हैं और लगातार फैसले ले रही हैं।
Daddu Prasad का सपा में जाना यूं ही नहीं, बल्कि इसके पीछे मिशन-2027 की गहरी रणनीति बताई जा रही है। दलित वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने के लिए Akhilesh Yadav लगातार नए सियासी समीकरण बना रहे हैं। Baba Saheb Ambedkar की जयंती पर घर-घर अभियान की शुरुआत पहले ही तय हो चुकी है, और अब Daddu Prasad जैसे पुराने दलित चेहरे की एंट्री ने इस मिशन को और धार दे दी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि Daddu Prasad वही नेता हैं जो कभी Mayawati के बेहद करीबी माने जाते थे। वे BSP सरकार में तीन बार विधायक और एक बार ग्रामीण विकास मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उनका सपा में जाना सिर्फ एक दलबदल नहीं, बल्कि BSP के कमजोर होते किले की कहानी भी कहता है।
माना जा रहा है कि Samajwadi Party अब BSP के पुराने दिग्गजों पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में कुछ और नेता SP में शामिल हो सकते हैं। इस सबके बीच Mayawati के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं। Chandrashekhar Azad की पार्टी, भाजपा के दलित कार्ड और अब सपा की एंट्री—तीनों ओर से दबाव बनता नजर आ रहा है।
Daddu Prasad की इस राजनीतिक घरवापसी ने UP की चुनावी जमीन को गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि Mayawati इस झटके से कैसे उबरती हैं और SP इस चाल को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाती है।
