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Sunday, August 31, 2025

केंद्र सरकार द्वारा जाति जनगणना की घोषणा: समय और संदर्भ पर विस्तृत विश्लेषण

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केंद्र सरकार द्वारा 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना की घोषणा भारत की सामाजिक-राजनीतिक दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। यह निर्णय उस समय आया जब देश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के कारण गहरे शोक और गुस्से की स्थिति में था। इस हमले में कुल 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई, जिससे देशभर में आक्रोश फैल गया और सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग होने लगी। ऐसे समय में जब देश की निगाहें राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान के प्रति सरकार की नीति पर टिकी थीं, केंद्र ने जाति आधारित जनगणना की घोषणा कर दी। यह कदम न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इसके समय पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

भारत में जातिगत जनगणना की मांग कई दशकों से होती रही है। स्वतंत्रता के बाद 1951 से केवल अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) की गणना की जाती रही है, जबकि अन्य जातियों, विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग की उपजातियों के बारे में ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। पिछली बार जाति आधारित गणना 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। इस कारण सरकार को सामाजिक कल्याण योजनाओं को बनाते समय जातिगत आंकड़ों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता प्रभावित होती है। इसलिए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब आगामी जनगणना में सभी जातियों की गणना की जाएगी, जिससे सामाजिक संरचना की यथार्थ तस्वीर सामने आ सके।

हालांकि इस घोषणा का समय अनेक राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पहलगाम हमले के बाद जब देश में पाकिस्तान विरोधी माहौल बन रहा था और सरकार पर सुरक्षा नीति को लेकर तीखे सवाल उठ रहे थे, उसी समय जाति जनगणना की घोषणा ने राजनीतिक विमर्श की दिशा बदल दी। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम रणनीतिक रूप से उठाया गया ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाकर आंतरिक सामाजिक मुद्दों की ओर मोड़ा जा सके। यह भी देखा गया कि सरकार ने आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए जैसे सिंधु जल संधि को निलंबित करना, सभी प्रकार के व्यापारिक रिश्तों को समाप्त करना और पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित करना। इन सभी घटनाओं के बीच जाति जनगणना की घोषणा ने विपक्ष को असमंजस में डाल दिया, जिससे उन्हें न तो हमले पर जोरदार प्रतिक्रिया देने का अवसर मिला, न ही जाति जनगणना की समयबद्धता पर गंभीर चर्चा करने का समय।

जाति जनगणना का राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक रूप से देखा जा रहा है। वर्तमान में भारत में आरक्षण की सीमा 50% तक तय है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘मंडल कमीशन’ के बाद संवैधानिक रूप से वैध माना है। यदि आगामी जनगणना में यह सामने आता है कि OBC वर्ग की जनसंख्या वर्तमान अनुमान से कहीं अधिक है, तो यह वर्ग आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की मांग करेगा। इससे सामाजिक समीकरणों में बदलाव आ सकता है। विभिन्न राज्यों में पहले से ही जातिगत समीकरणों पर आधारित राजनीति चल रही है, और नई जानकारी से क्षेत्रीय दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। कुछ राज्य पहले ही अपनी अलग-अलग जाति गणनाएं कर चुके हैं, जैसे बिहार ने हाल ही में अपनी जातिगत गणना प्रकाशित की थी, जिससे वहां राजनीतिक बहस और रणनीतियों में बड़ा बदलाव आया।

विपक्षी दलों ने इस घोषणा का स्वागत तो किया है, लेकिन उसके समय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने रणनीतिक रूप से यह निर्णय उस समय लिया जब देश का ध्यान पाकिस्तान और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित था। इससे विपक्ष को सरकार की विदेश नीति और आतंकवाद विरोधी रणनीति पर सवाल खड़े करने का अवसर कम मिला। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं का यह भी आरोप है कि सरकार जाति जनगणना के माध्यम से सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि आने वाले चुनावों में जातिगत समीकरणों का लाभ उठाया जा सके। यह भी चिंता जताई जा रही है कि जातिगत आंकड़ों का इस्तेमाल केवल आरक्षण नीति के लिए नहीं बल्कि सामाजिक विभाजन को गहराने के लिए भी किया जा सकता है।

इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि जाति जनगणना की घोषणा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक बहुआयामी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति भी है। इसका दूरगामी प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत की राजनीति, सामाजिक संरचना और नीति निर्माण की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशित होने के बाद सरकार और विपक्ष किस तरह से इसे अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल करते हैं, और यह भारतीय समाज के भीतर संतुलन और समरसता के लिए एक सेतु बनेगा या विभाजन की रेखाओं को और गहरा करेगा।

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