भारत के चर्चित और मुखर राजनीतिज्ञ सत्यपाल मलिक का दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे अपने सख्त और बेबाक विचारों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहे। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और वे सांसद तथा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल जैसे अहम पदों तक पहुंचे।
विद्यार्थी राजनीति से संसद तक
1970 में सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1974 में चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल के टिकट पर बागपत से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनैतिक क्षेत्र में मजबूत प्रवेश किया। समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे सत्यपाल मलिक जीवनभर किसानों, मजदूरों और आम लोगों के हितों की बात करते रहे।
राज्यपाल के तौर पर अनूठा दौर
सत्यपाल मलिक ने पांच साल (2017 से 2022) के भीतर बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा, मेघालय सहित कुल पांच राज्यों में राज्यपाल की जिम्मेदारी निभाई। उनका जम्मू-कश्मीर में गवर्नर रहते हुए कार्यकाल बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। इसी दौरान अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के पुनर्गठन जैसा ऐतिहासिक फैसला सरकार द्वारा लिया गया। सत्यपाल मलिक ने बतौर गवर्नर कई बार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और खुलकर बयान देते रहे।
किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका
सत्यपाल मलिक खुद को चौधरी चरण सिंह का शिष्य मानते थे और किसान मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में वे लगातार सरकार के विरुद्ध मुखर रहे। उन्होंने किसानों के पक्ष में कई राज्यों का दौरा किया और केंद्र सरकार से कानून वापस लेने की अपील की। इसी कारण मीडिया, किसान नेताओं और राजनीतिक हलकों में वे खूब चर्चित रहे।
विवादों और आरोपों से जुड़ी चर्चाएं
गवर्नर रहते उन्होंने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में करप्शन के मुद्दे सार्वजनिक रूप से उठाए। बाद में, इसी मामले में सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने पर उन्होंने सार्वजनिक बयान देकर हैरानी जताई। पिछले कुछ वर्षों से वे भाजपा व सरकार की कई नीतियों के विरोध में दिखाई देते रहे, यहां तक कि 2024 लोकसभा चुनाव में विपक्ष का समर्थन करने और सरकार के खिलाफ मतदान करने की सार्वजनिक अपील भी की।
सत्यपाल मलिक की विरासत
सत्यपाल मलिक राजनीति के ऐसे स्वर हैं जिन्होंने राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहकर भी स्वतंत्र और बेधड़क विचार व्यक्त किए। उनके निधन से भारतीय राजनीति को एक स्वच्छ छवि और किसान-मजदूर समर्थक नेता की क्षति हुई है। उनका साहसिक और निष्पक्ष दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।