भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा समय में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब घाटी में पर्यटन का सीजन चरम पर था और यह स्थान शांति का प्रतीक माना जाता है। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा का ही एक छद्म चेहरा है और इसे सीधे तौर पर पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन प्राप्त है।
लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रकार की स्थिति की भविष्यवाणी अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने 32 साल पहले ही कर दी थी। साल 1993 में CIA ने ‘नेशनल इंटेलिजेंस एस्टिमेट’ (NIE) नाम से एक क्लासिफाइड रिपोर्ट तैयार की थी, जिसका नेतृत्व अनुभवी अधिकारी ब्रूस रीडेल ने किया था। इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच यदि युद्ध होता है, तो इसकी जड़ कश्मीर जैसे मुद्दे में होगी, और पाकिस्तान शुरुआत से ही कमजोर स्थिति में होगा।
पाकिस्तान का रणनीतिक डर
इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान हर स्तर पर—राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य—भारत से खुद को कमजोर मानता है और इसी हीन भावना से वह आतंकवाद को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की आतंकवाद आधारित रणनीति को “Low-cost, High-impact” युद्ध नीति कहा गया है। इसका सीधा अर्थ है कि सीमित संसाधनों और न्यूनतम खर्च में भारत को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना। पाकिस्तान वर्षों से कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर को अंजाम दे रहा है। वह आतंकियों को न केवल प्रशिक्षण देता है, बल्कि उन्हें हथियार और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराता है।
CIA की भविष्यवाणी और मौजूदा परिदृश्य
1993 की NIE रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई थी कि एक बड़ा आतंकी हमला भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव की वजह बन सकता है। पहलगाम हमला इस चेतावनी का जीवंत उदाहरण है। भारत में इस हमले को लेकर गुस्सा है, और सीमाओं पर सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है। भारतीय नौसेना ने अरब सागर में युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है, वहीं पाकिस्तान ने भी सीमावर्ती समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं।
पाकिस्तान की पुरानी और वर्तमान हालत में समानता
CIA की रिपोर्ट में 1993 में ही यह साफ कहा गया था कि भारत, अपनी आंतरिक समस्याओं के बावजूद, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास की राह पर है। उस समय भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह कर रहे थे, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की दिशा में अग्रसर किया। इसके उलट, पाकिस्तान उस समय भी राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य हुकूमत और आर्थिक संकटों से जूझ रहा था। 32 साल बाद आज भी स्थिति बहुत बदली नहीं है। पाकिस्तान अब भी आंतरिक उथल-पुथल, कट्टरपंथ, आर्थिक दिवालियेपन और वैश्विक स्तर पर अलग-थलग होने की स्थिति में है।
आतंकवाद: पाकिस्तान का नया चेहरा
रिपोर्ट में चेताया गया था कि आने वाले समय में पाकिस्तान इस्लाम को केवल आस्था नहीं बल्कि एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगा। वर्तमान में पाकिस्तानी राजनीति और सुरक्षा नीति में जिस तरह से धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद को मुख्य स्थान मिला है, वह उसी भविष्यवाणी का प्रमाण है। पाकिस्तान की सेना और ISI ऐसे संगठनों को संरक्षण देती हैं, जो भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद फैलाते हैं।
अमेरिका की भूमिका और विफलताएं
1993 की NIE रिपोर्ट केवल CIA के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के व्हाइट हाउस और विदेश विभाग के लिए भी एक चेतावनी थी। इसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोकना था। अमेरिका ने दोनों देशों को तनाव कम करने के लिए हॉटलाइन, परमाणु समझौते और विश्वास बहाली उपायों की सलाह दी, लेकिन जब-जब भारत पर बड़े आतंकी हमले हुए, इन उपायों की असलियत सामने आई और वे अधिकांश बार विफल साबित हुए।
अमेरिका की विफलता यह रही कि वह पाकिस्तान को समय पर नियंत्रित नहीं कर पाया। आतंकवाद को रणनीति के रूप में अपनाने वाले पाकिस्तान को बार-बार आर्थिक सहायता दी गई, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसे समर्थन मिला और FATF जैसी संस्थाओं में भी उसे ‘ग्रे लिस्ट’ में डालकर छोड़ दिया गया। नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी मुख्य नीति बना लिया।