अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ बढ़ाने के फैसले के बाद भारत सरकार ने अमेरिका से आगामी रक्षा सौदों को लेकर बड़ी ही कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका से हथियार और विमान खरीद की सभी प्रमुख योजनाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों में नए तनाव की स्थिति बनी है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की डील पर चर्चा को लेकर निर्धारित अमेरिकी यात्रा भी फिलहाल रद्द कर दी गई है। इस यात्रा के दौरान लगभग 3.6 बिलियन डॉलर मूल्य के सौदों पर अंतिम सहमति बनने की संभावना थी, जिसमें अमेरिकी कंपनी जनरल डायनामिक्स के स्ट्राइकर वाहन, रेथॉन-लॉकहीड मार्टिन की जैवलिन मिसाइल और बोइंग के P8I निगरानी विमान शामिल थे। फरवरी माह में इन सौदों को लेकर भारत-अमेरिका नेतृत्व के बीच संतोषजनक वार्ता हुई थी, लेकिन अब द्विपक्षीय परिस्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने 6 अगस्त को टैरिफ बढ़ाने की घोषणा की और कारण बताया कि भारत रूस से सस्ते तेल की खरीद कर रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष सहयोग मिल रहा है। भारत सरकार ने इस आरोप को अनुचित बताते हुए कहा है कि यूरोप और अमेरिका के अपने हित हैं, लेकिन भारत का निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं। भारत ने हाल ही में अपने सैन्य सामान की खरीद में रूस पर निर्भरता कम कर पश्चिमी देशों से सहयोग बढ़ाया था, बावजूद इसके इस टैरिफ विवाद ने भारत-अमेरिका रक्षा भागीदारी पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अभी कोई स्थायी निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन जब तक टैरिफ का मुद्दा सुलझता नहीं, तब तक हथियार सौदों पर काम नहीं होगा। अधिकारी मानते हैं कि अमेरिका के इस कदम से न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक सहयोग भी प्रभावित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर वैश्विक हथियार बाजार में नए समीकरण बन रहे हैं और इस समय भारत के लिए विश्वसनीय सहयोगी चुनना चुनौतीपूर्ण है।
हालांकि, मौजूदा समय में भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग, इंटेलिजेंस साझेदारी तथा संयुक्त सैन्य अभ्यास संचालित होते रहेंगे। लेकिन अगर मौजूदा टैरिफ विवाद लंबा चलता है, तो इससे न केवल रक्षा खरीद पर, बल्कि दो देशों की साझेदारी पर भी असर पड़ेगा। वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना दोनों देशों के हित में रहेगा। आगामी दिनों में दोनों सरकारों के राजनयिक प्रयासों से ही इस विवाद का भविष्य तय होगा।