Home देश राजनीति WhatsApp आदेश, बिना तैयारी SIR! ममता ने चुनाव आयोग को घेरा

WhatsApp आदेश, बिना तैयारी SIR! ममता ने चुनाव आयोग को घेरा

वोटर लिस्ट SIR पर ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, WhatsApp आदेशों और अव्यवस्था का आरोप, प्रक्रिया रोकने की चेतावनी।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर टकराव और तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया भारी अव्यवस्था, जल्दबाजी और प्रशासनिक लापरवाही के साथ चलाई जा रही है। उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग से या तो तुरंत खामियां दूर करने या फिर इस अभ्यास को पूरी तरह रोकने की मांग की है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR को बिना पर्याप्त होमवर्क के लागू किया गया। उनके मुताबिक, आईटी सिस्टम में तकनीकी खामियां हैं, अधिकारियों को दिए जा रहे निर्देश एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों को इस संवेदनशील जिम्मेदारी के लिए ठीक से प्रशिक्षित नहीं किया गया।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि अहम निर्देश औपचारिक आदेशों के बजाय व्हाट्सऐप और मैसेज के जरिए दिए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि संविधान से जुड़े इतने महत्वपूर्ण काम में लिखित अधिसूचना और वैधानिक आदेश अनिवार्य होते हैं, लेकिन यहां रोज नए-नए निर्देश बिना किसी तय प्रक्रिया के भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इसे योजना की पूरी तरह से कमी और प्रशासनिक अराजकता का उदाहरण बताया।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का कहना है कि अगर मौजूदा स्वरूप में SIR को जारी रहने दिया गया, तो इससे बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकता है। ममता ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने नवंबर और दिसंबर में भी इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग को पत्र लिखे थे, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय चुनाव आयोग के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस ताजा पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। रविवार शाम तक भी आयोग की चुप्पी बनी रही।

गौरतलब है कि SIR की प्रक्रिया इस समय 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। पश्चिम बंगाल में इसे लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले सकता है।

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