संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को भी बैठक में आमंत्रित किए जाने का मुद्दा सामने आया। इस पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से सांकेतिक (सिंबॉलिक) वॉकआउट कर दिया। हालांकि, बाद में विपक्षी नेताओं ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया और इसके बाद दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने पार्टी के आधिकारिक सांसदों की जगह पहले बागी सांसदों की सूची प्रदर्शित की, जिसे उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। टीएमसी नेताओं का कहना था कि किसी भी राजनीतिक दल के अधिकृत प्रतिनिधियों की अनदेखी कर बागी सांसदों को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।
बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि टीएमसी ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष ने इस पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सांकेतिक वॉकआउट किया, ताकि सरकार को यह संदेश दिया जा सके कि संसदीय प्रक्रियाओं और राजनीतिक दलों की वैधानिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य संसद सत्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच संवाद स्थापित करना होता है। ऐसे में यदि किसी दल के अधिकृत प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद पैदा होता है, तो इससे बैठक के मूल उद्देश्य पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दलों ने बैठक का पूरी तरह बहिष्कार नहीं किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी आपत्ति सार्वजनिक करने के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हुए और आगामी मानसून सत्र में उठाए जाने वाले विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखी।
गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र जल्द शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। सर्वदलीय बैठक को इसी रणनीतिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है, जहां सत्र के एजेंडे, विधायी कार्यों और सदन के सुचारु संचालन को लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की जाती है। लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही टीएमसी के बागी सांसदों को लेकर उठा विवाद राजनीतिक माहौल को गर्मा गया है और इसके असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिल सकते हैं।
