राजस्थान के शिक्षा विभाग ने हाल ही में जारी हुए तबादला आदेशों को लेकर असंतुष्ट शिक्षकों और कार्मिकों को बड़ी राहत दी है। विभाग ने स्थानांतरण आदेशों से जुड़े विवादों और शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियों का गठन किया है। अब जिन शिक्षकों को अपने तबादले पर आपत्ति है या जो किसी विशेष परिस्थिति के आधार पर राहत चाहते हैं, वे 24 जुलाई 2026 तक अपनी परिवेदनाएं (शिकायतें) प्रस्तुत कर सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह व्यवस्था 19 जून से 10 जुलाई 2026 के बीच जारी किए गए स्थानांतरण आदेशों से संबंधित मामलों पर लागू होगी। विभागीय स्तर पर गठित समितियां सभी प्राप्त परिवेदनाओं की सुनवाई कर उनका निस्तारण करेंगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के साथ अन्याय न हो और विशेष परिस्थितियों वाले मामलों का निष्पक्ष तरीके से समाधान किया जा सके।
विभाग ने शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए निदेशालय स्तर और संभाग स्तर पर अलग-अलग समितियों का गठन किया है। निदेशालय स्तर पर गठित समिति के अध्यक्ष अतिरिक्त निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) होंगे। वहीं समिति में संयुक्त निदेशक (कार्मिक), संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण), उपनिदेशक (प्रशासन) तथा सहायक निदेशक (स्थापना) को सदस्य बनाया गया है। ये समिति स्थानांतरण से जुड़े मामलों की जांच कर आवश्यक निर्णय लेगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा। इसमें गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, पारिवारिक परिस्थितियां, पति-पत्नी की एक ही स्थान पर नियुक्ति, महिला कर्मचारियों से जुड़े विशेष मामले तथा अन्य मानवीय आधारों पर प्रस्तुत आवेदन शामिल हो सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित समिति द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों और नियमों के आधार पर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि हालिया तबादला सूची जारी होने के बाद प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया था। कई शिक्षक संगठनों ने तबादला नीति में पारदर्शिता, वरिष्ठता, रिक्त पदों और व्यक्तिगत परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने शिकायतों के समाधान के लिए यह विशेष व्यवस्था लागू की है।
अब सभी संबंधित शिक्षक और कर्मचारी 24 जुलाई तक अपनी परिवेदनाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि समितियां प्राप्त सभी आवेदनों की सुनवाई कर नियमों के अनुरूप निर्णय लेंगी, ताकि स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बन सके।
