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कहां चला गया मानसून? गर्मी ने छुड़ाए पसीने, करीब 4-5 और करना होगा इंतजार

राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, जिससे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का लंबा इंतजार बना हुआ है। पिछले करीब एक सप्ताह से राज्य के अधिकांश जिलों में उल्लेखनीय बारिश नहीं होने के कारण किसान और आमजन दोनों परेशान हैं। खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें, विशेषकर दालों और मोटे अनाज की फसलें, पर्याप्त नमी नहीं मिलने से प्रभावित होने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है, जबकि 21 जुलाई के बाद बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।

शुक्रवार (17 जुलाई) को कोटा, डूंगरपुर और अलवर के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, लेकिन प्रदेश के अधिकांश हिस्से सूखे रहे। लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की मिट्टी में नमी कम हो रही है और किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। कई क्षेत्रों में सिंचाई पर निर्भरता भी बढ़ गई है।

ट्रफ लाइन और कम दबाव क्षेत्र पर मौसम विभाग की नजर

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पूर्वी भारत के ऊपर बना वेल मार्क लो प्रेशर एरिया अब कमजोर होकर सामान्य कम दबाव क्षेत्र में बदल गया है। वर्तमान में यह परिसंचरण तंत्र पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के आसपास सक्रिय है। वहीं, मानसून ट्रफ लाइन अमृतसर, चंडीगढ़ और पटना से होकर गुजर रही है, जिसके कारण राजस्थान में मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में कमजोर मानसून की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि पूर्वी राजस्थान के कोटा, भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ क्षेत्रों में 21 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

22-23 जुलाई से पश्चिमी राजस्थान में भी बढ़ेगी बारिश

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 22 और 23 जुलाई से राज्य के मध्य और पश्चिमी भागों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने लगेंगी। इसके बाद 23 से 28 जुलाई के बीच पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग के कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है और खरीफ फसलों को भी संजीवनी मिलेगी।

बारिश थमने से बढ़ी उमस और गर्मी

बारिश नहीं होने का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। श्रीगंगानगर शुक्रवार को प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा बीकानेर, चूरू और पिलानी में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। जुलाई के महीने में उमस भरी गर्मी ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून दोबारा सक्रिय नहीं होता, तब तक गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना कम है।

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