आज पूरे कारोबार सत्र में निवेशकों के चेहरे पर डर और चिंता दिख रही थी, लेकिन बाज़ार बंद होने से करीब एक घंटे पहले ही स्थिति पलट गई। दिन भर 1500 अंक से अधिक चढ़ने‑घटने के बाद अंत में दलाल स्ट्रीट ने उफ़राहट भरी बंदी दर्ज की। BSE सेंसेक्स आज 185.23 अंक तेज़ी के साथ 73,319.55 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 33.70 अंक बढ़कर 22,713.10 के लेवल तक पहुँच गया। इस उल्टफेर से पहले ही सेंसेक्स सत्र में लगभग 1500 अंक तक गिरकर 71,545.81 के निचले स्तर तक लुढ़क चुका था।
सेंसेक्स में IT, फाइनेंशियल्स की चमक
आज सेंसेक्स के 30 में से ज़्यादातर शेयर हरे निशान पर बंद हए, जिन में खासकर आईटी और चुनिंदा फाइनेंशियल स्टॉक्स में ज़ोरदार खरीदारी दिखी। HCL Tech और Tech Mahindra सबसे ज़्यादा उछाल वाले शेयर रहे, साथ ही TCS, Infosys और Bajaj Finance में भी मजबूत बायिंग रही। इधर, बिकवाली के मोर्चे पर Asian Paints, Eternal, Sun Pharma, NTPC और Reliance Industries (RIL) शीर्ष लूज़र्स बने और इनमें 2–4% की दबाव देखी गई।
मिड / स्मॉल‑कैप में सीमित रिकवरी
NSE पर मिड‑कैप और स्मॉल‑कैप शेयरों में भी अंतिम एक घंटे में कुछ रिकवरी आई, लेकिन पूरे सत्र की तेज़ गिरावट के कारण ये अंततः लाल निशान में ही बंद हुए। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.12% टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.20% लुढ़क गया।
सेक्टर‑वाइज परफॉर्मेंस: IT और रियल्टी लीड
इन आंकड़ों से साफ होता है कि IT, रियल्टी, निजी बैंक, FMCG और मेटल सेक्टर ने बाज़ार को उबारने में अहम भूमिका निभाई, जबकि ऑटो, मीडिया, फार्मा, केमिकल्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और सरकारी बैंकों के शेयर मार्केट कारोबार के दौरान दबाव में रहे।
रिकवरी के पीछे रुपये की मजबूती और RBI के कदम
आज रुपये में लगभग 1.8% की तेज़ तेज़ी आई और यह 93.17 प्रति डॉलर के लगभग स्तर तक पहुँच गया। यह हिलड़ोल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हाल के कड़े फैसलों से जुड़ा है, जिनका मकसद रुपये में अत्यधिक निर्धारण‑आधारित उतार‑चढ़ाव (NDF‑प्रभाव) को कम करना है। RBI ने 1 अप्रैल को बैंकों को Non‑Deliverable Forward (NDF) जैसे सौदों में रुपये की ट्रेडिंग से रोक दिया और कंपनियों को पुराने कैंसिल किए गए फॉरेक्स कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने की अनुमति भी नहीं दी। इन फैसलों से बाजार में डॉलर की मांग घटी और रुपये को मजबूती मिली।
साथ ही, पिछले कुछ दिनों से युद्ध और भू‑राजनीतिक तनाव के कारण काफी बड़ी बिकवाली हो चुकी थी, जिससे अनेक गुणवत्तापूर्ण शेयर छोटे वैल्यूएशन पर पहुँच गए। ऐसे में जब रुपये में स्थिरता आई और वैश्विक भावनाएं थोड़ी सुधरीं, तो निवेशकों ने खरीदारी में तेज़ी दिखाई, खासकर मजबूत फंडामेंटल वाले आईटी, रियल्टी, FMCG और प्राइवेट बैंक शेयरों में फंड जमा किया। इस तरह आज रुपये‑आधारित मजबूती और “डिप बर्बरी” के मिश्रण ने भारतीय बाज़ार को अंतिम घंटे में पलटा।
