पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है। पश्चिमी ईरान में सभी एयरपोर्ट अगली सूचना तक बंद कर दिए गए हैं, जबकि भारतीय नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर, इजरायल में लगातार हमलों के बीच सायरन बज रहे हैं और नागरिकों में दहशत का माहौल है।
यह संघर्ष तब भड़का जब इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने खैबर शेकन जैसी घातक मिसाइलों से पलटवार किया। हमलों के साथ भेजे गए संदेश—“हम लेबनान को अकेला नहीं छोड़ेंगे”—ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया। तेहरान में जहां युद्ध का माहौल है, वहीं कुछ स्थानों पर लोग सेना के समर्थन में जश्न मनाते भी नजर आए।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए युद्धविराम की अपील की है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। जहां अमेरिका कूटनीतिक समाधान चाहता है, वहीं इजरायल सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में है। इजरायल के भीतर भी प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ विरोध तेज हो गया है।
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते खतरे ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो वैश्विक आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
