कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए हैं, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक महंगाई बढ़ा दी है। हालांकि, इस बीच सरकार की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि कच्चे तेल और गैस की मौजूदा ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी नहीं रहेंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। पुरी के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल इतना तेल और गैस भंडार है जो करीब 70 से 80 दिनों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष लंबा खिंचता है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। फिलहाल, सरकार संभावित संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी काम कर रही है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए भारत अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाने की रणनीति पर विचार कर रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक सप्लाई पर पड़ता है, क्योंकि दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
