राजस्थान में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और प्रदेश के विकास को गति देने की जिम्मेदारी शीर्ष अधिकारियों पर है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास विभिन्न कार्यालयों का दौरा कर रहे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। लेकिन इन प्रशासनिक गतिविधियों के बीच एक अहम सवाल उठता है – जब मुख्य सचिव रोज अधिकारियों से मिल सकते हैं, तो क्या वे आम जनता, गरीबों और जरूरतमंदों की समस्याएं सुनने के लिए भी नियमित समय नहीं निकाल सकते?
प्रदेश में ऐसे अनेक लोग हैं, जो अपनी शिकायत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं। कई बार निचले स्तर के अधिकारियों तक उनकी आवाज नहीं पहुंचती, तो कई मामलों में सुनवाई और समाधान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उनकी समस्याएं सीधे प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी तक कैसे पहुंचें?
अधिकारियों के साथ बैठकें जरूरी, लेकिन जनता से संवाद भी उतना ही अहम
मुख्य सचिव का अलग-अलग कार्यालयों में जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करना प्रशासनिक कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे विभागों की कार्यप्रणाली समझने और कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है। लेकिन प्रशासन का उद्देश्य केवल बैठकों और समीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका असली लक्ष्य आम जनता को राहत देना भी है।
यदि किसी गरीब परिवार को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा, किसी कर्मचारी की समस्या लंबे समय से लंबित है या किसी नागरिक की शिकायत पर स्थानीय अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे, तो वह अपनी बात किसके सामने रखे? क्या मुख्य सचिव कार्यालय में सप्ताह में एक निश्चित दिन और समय आम लोगों की शिकायतें सुनने के लिए निर्धारित नहीं किया जा सकता?
क्या गरीबों की आवाज शीर्ष प्रशासन तक पहुंच रही है?
यह सवाल किसी अधिकारी की कार्यशैली पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने का नहीं, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और जनसुलभता का है। निचले स्तर पर यदि शिकायतों की सुनवाई प्रभावी ढंग से हो रही हो, तो नागरिकों को बार-बार शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचने की जरूरत ही नहीं पड़नी चाहिए। लेकिन जब लोगों को लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें, तब व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या वे आम जनता के लिए नियमित जनसुनवाई का समय निर्धारित करने पर विचार करेंगे? क्या ऐसा तंत्र बनाया जा सकता है, जिसमें शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी स्थिति और समाधान की समयसीमा भी स्पष्ट हो?
विकसित राजस्थान के लिए जनता से सीधा संवाद जरूरी
यदि राजस्थान को वास्तव में विकसित और जवाबदेह प्रशासन वाला प्रदेश बनाना है, तो सरकारी व्यवस्था में आम नागरिक की आवाज को प्राथमिकता देनी होगी। अधिकारियों से बैठकें करना जरूरी है, लेकिन जनता से सीधे संवाद की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
क्या मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास गरीबों और आम नागरिकों की समस्याएं सुनने के लिए नियमित समय निर्धारित करेंगे, या लोगों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए पहले की तरह सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?
इस सवाल का जवाब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था से मिलना चाहिए, जिसमें आम आदमी को अपनी बात रखने का अवसर मिले और उसकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हो।
क्योंकि प्रशासन की असली सफलता इस बात से तय होती है कि वह कितनी बैठकें करता है, इससे नहीं; बल्कि इस बात से तय होती है कि उसकी व्यवस्था से आम नागरिक को कितनी राहत मिलती है।
