नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन: पुतिन, शी जिनपिंग समेत कई नेताओं के आने की संभावना

0
4

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की मेजबानी में होने वाले इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, विकास, वित्तीय सहयोग, आतंकवाद, भू-राजनीतिक तनाव और बदलती विश्व व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न देशों के नेताओं के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठकों पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

मोदी-पुतिन मुलाकात पर नजर

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के BRICS सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित बताई गई है। इस वार्ता में रक्षा सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार, निवेश, भुगतान व्यवस्था और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।

भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा तथा ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत सहयोग रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों, तेल आपूर्ति, रुपये-रूबल भुगतान व्यवस्था और नए आर्थिक गलियारों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। BRICS सम्मेलन से पहले होने वाली यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

मोदी-शी बैठक भी अहम

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर को द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित बताई जा रही है। गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की संभावित आमने-सामने की बैठक को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस मुलाकात में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति और स्थिरता, सीमा विवाद, दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते, निवेश, सप्लाई चेन और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। शी जिनपिंग का करीब सात साल बाद संभावित भारत दौरा भी कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से बैठक और किसी संभावित समझौते को लेकर औपचारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा।

कई देशों की भागीदारी संभव

शिखर सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और थाईलैंड के प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना है। फिलीपींस के राष्ट्रपति, वियतनाम के प्रधानमंत्री, मलेशिया के प्रधानमंत्री और मिस्र के राष्ट्रपति भी आमंत्रित देशों की सूची में शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा उज्बेकिस्तान, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, ब्राजील और क्यूबा की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व की उम्मीद है। यूएई की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, जबकि सऊदी अरब और बहरीन की ओर से विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

सम्मेलन में विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक, न्यू डेवलपमेंट बैंक के अध्यक्ष और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के अध्यक्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शीर्ष प्रतिनिधि भी पहुंच सकते हैं। इससे विकास, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था, स्वास्थ्य सहयोग, बुनियादी ढांचा निवेश और व्यापार सुधारों से जुड़े मुद्दों को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत की मेजबानी में BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया व्यापारिक तनाव, ऊर्जा संकट, युद्धों, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं और बदलते शक्ति संतुलन जैसी चुनौतियों से गुजर रही है। भारत BRICS मंच के जरिए विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे रखने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में अपनी भूमिका बढ़ाने का प्रयास कर सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह सम्मेलन बहुपक्षीय कूटनीति के साथ-साथ रूस, चीन, ईरान और अन्य साझेदार देशों के साथ द्विपक्षीय संवाद का भी बड़ा अवसर होगा। सम्मेलन में होने वाली संभावित मुलाकातों और साझा घोषणाओं पर पूरी दुनिया की निगाह रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here